सुना है स्वामी दयानंद पाद के बारे में ऐसे विचार रखते थे,और पाद रक्षा के लिए वेदों का सहारा लेते थे?
मन्त्र संख्या 14/ 8 , यजुर्वेद दयानन्द भाष्य ।
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हे पते वा स्त्री , तू बहुत प्रकार की उत्तम क्रिया से , मेरे नाभि से ऊपर
चलने वाले प्राणवायु की रक्षा कर , मेरे नाभि के नीचे , गुदेन्द्रियो से
निकलने वाली अपान वायु की रक्षा कर ....
तुम
मेरे शरीर और दोनों पैर की ईक्षा वाली हो,मेरे दोनों नेत्र और दोनों
जंघाएं की कामना करने वाली हो,मेरे अंग प्रत्यंग को स्नेह भरी दृष्टि से
देखो,सेचन की कामना युक्त तुम्हारी आंखे और घने बाल मेरे होश उड़ाए है।
ईश्वर वाणी सुनिए, आर्य समजियो ने इस्लाम पर किताब लिखी थी मनघड़ंत रंगीला रसूल।
अथॆवेड
ईश्वर वाणी सुनिए, आर्य समजियो ने इस्लाम पर किताब लिखी थी मनघड़ंत रंगीला रसूल।
अथॆवेड
वाल्मीकि रामायण में सीता के स्तनों का वर्णन जरूरी था?आर्य समाजियों ने रसूल को रंगीला देख लिया, इन शब्दों को क्या कहेंगे कौन रसीला??
रावण द्वारा सीता हरण के उपरांत राम विलाप करते हुए कहते है ,
मेरे प्रिया के दोनों गोल गोल स्तन जो सदा लाल चंदन से चर्चित होने योग्य थे ओ रक्त की किच में सन गए होंगे,
हाय इतने पर भी मेरे शरीर का पतन नहीं होता।
वाल्मीकि रामायण अरण्यकंड ६३ स्लोक ८।




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