*जिस धर्म के धर्मसास्त्रों में ऐसी बातें लिखी है, क्या वह धर्म धर्माचरण करने लायक है*****************************************************************
जब हम पढ़े लिखे नहीं थे तो हमारी मजबूरी थी । लेकिन आज शिक्षित समाज को ऐसे धर्म के धर्माचरण क्यों करना चाहिए ?
1 - यह जो ब्राम्हण, क्षेत्रीय, वैश्य व शूद्र जो विभाजन है वह मेरा द्वारा ही रचा गया है।
- :गीता 4-13
2 - मेरी शरण में आकर स्त्री ,वैश्य , शूद्र भी जिन कि उत्त्पति पाप योनि से हुई है, परम गति को प्राप्त हो जाते है।
-:भगवत गीता 9-32
3 - शूद्र का प्रमुख कार्य तीनों वर्णो की सेवा करना है।
-: महाभारत 4/50/6
4 - शूद्र को सन्चित धन से स्वामी कि रक्षा करनी चाहिये।
-: महाभारत 12/60/36
5 - शूद्र तपस्या करे तो राज्य निर्धनता में डूब जायेगा।
-: वाo .रामायण 7/30/74
6- ढोल .गवार .शूद्र पशु नारी |
सकल ताड़ना के अधिकारी ||
-: रामचरित मानस 59/5
7- पूजिये विप्र सील गुन हीना, शूद्र न गुण गन ग्यान प्रविना।
-:रामचरितमानस 63-1
8- वह शूद्र जो ब्राम्हण के चरणो का धोवन पीता है राजा उससे कर TAX न ले।
-: आपस्तंबधर्म सूत्र 1/2/5/16
9 - जिस गाय का दूध अग्निहोत्र के काम आवे शूद्र उसे न छुये।
- : कथक सन्हिता 3/1/2
10- शूद्र केवल दूसरो का सेवक है इसके अतिरिक्त उसका कोइ अधिकार नही है।
-: एतरेय ब्राम्हण 2/29/4
11- यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा दे तो उस ब्राम्हण को चान्डाल की भाँति त्याग देना चाहिये।
-: स्कंद पुरान 10/19
12 - यदि कोइ शूद्र वेद सुन ले तो पिघला हुआ शीशा, लाख उसके कान में डाल देना चाहिये।
यदि वह वेद का उच्चारण करे तो जीभ कटवा देना चाहिये। वेद स्मरण करे तो मरवा देना चाहिये।
-: गौतम धर्म शूत्र 12/6
13 - देव यज्ञ व श्राद्ध में शूद्र को बुलाने का दंड 100 पर्ण।
- : विष्णु स्मृति 5/115
14 - ब्राम्हण कान तक उठा कर प्रणाम करे, क्षत्रिय वक्षस्थल तक, वैश्य कमर तक व शूद्र हाथ जोड़कर एवं झुक कर प्रणाम करे।
-: आपस्तंब धर्म शूत्र 1,2,5,/16
15 - ब्राम्हण की उत्पत्ति देवता से, शूद्रो की उत्पत्ति राक्षस से हुई है।
-: तेत्रिय ब्राम्हण 1/2/6/7
17 - यदि शूद्र जप ,तप, होम करे तो राजा द्वारा दंडनिय है।
-: गौतम धर्म सूत्र 12/4/9
17- यज्ञ करते समय शू
●●●●
No comments:
Post a Comment