Tuesday, 9 August 2022

वीर्य।


3 January 2022

ब्रहमवैवर्त पुराण में लिखा है

 कि ब्रह्मा का रती को देख कर वीर्य का पात हो गया। वहां पर जो दूसरे उपस्थित थे उन्होंने वीर्य को कपडे से ढक दिया। लेकिन वीर्य अग्नि के समान दग्ध कर रहा था जिसको श्री कृष्ण ने फूंक मार कर बुझाया। फूंक में जल कण था उसी से अग्नि बुझ गई। तभी से पानी से आग बुझती है। (ब्रहमवैवर्त पुराण ब्रह्म खंड अध्याय 4) (1 और 6) इसी अध्याय में ही आगे चल कर लिखा है कि श्री कृष्ण को काम के बाण से देवो कि सभा में ही वीर्य पात हो गया, जिसको शर्म के कारण जल में डाल  दिया। (1) जबकि अग्नि पुराण 169 वें अध्याय में लिखा है कि वीर्य को पानी में छोड़ने वाले को पाप लगता है। (2) महाभारत के अनुशासन पर्व के 85 वे अध्याय में एक यज्ञ का वर्णन है जिसमे देवकन्याएं, देवपत्नियां और देवमाताएं भी आई लेकिन ब्रह्मा का वीर्य इनको देख कर टपकने लगा। एक बार तो जमीन पर गिर हुआ और दूसरी बार ब्रह्मा ने खुद घी वाले चम्मच में ले कर घी का भांति अग्नि में होम कर दिया। (3)

महाभारत के अनुशासन पर्व के 14 वे अध्याय श्लोक नंबर 216 में लिखा है कि शिव के वीर्य की आहुति देवासुर गुरु अग्नि के मुख में आहुति दी गई थी।(4)

लेकिन किसी अप्सरा को देख कर किसी का वीर्यपात हो जाए तो बड़ी हंसी भी होती है और ब्रह्मा जी उसको श्राप देते है कि वह शुद्र के घर जन्म लेगा। यानी शुद्र के घर जन्म होना श्राप या पूर्व जन्म के बुरे कामों का नतीजा है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड अध्याय 13) (5)
पुराणों के संबंधित पन्ने पोस्ट कर दिए हैं। ऊपर कोष्टक में जो अंक लिखे है वही उस पन्ने पर लिख दिए हैं।

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