Thursday, 2 February 2023

कर्मफल।

बामनो के पाखंड का भांडा फोड

क्या गीता मनुस्मृती मे व्यवसाय आधारित वर्ण व्यवस्था हैं
Nov. 09/022 

बहोत सारे लोग गीता मनुस्मृति में व्यवसाय आधारित वर्ण व्यवस्था की बात करते है। 

यहां हमने कर्म शब्द का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया है क्युकी आज कल लोग व्यवसाय के लिए कर्म शब्द का इस्तेमाल कर रहे है जबकि दर्शन उपनिषद् में कर्म शब्द की अलग ही व्याख्या है 

दर्शन उपनिषद् में कर्म की व्याख्या ये है आपको यह को जन्म मिला है वो पिछेले जन्म के कर्मों का फल है 

ऐसे ही कर्मो का फल भुगतने के लिए आपको बार बार 84 लाख योनियों से पुनर्जन्म लेना पड़ता है 
RC Joshi 
ये जन्म किस प्राणी का या मनुष्य में किस वर्ण का मिला है ये पिछले जन्म के कर्म पर आधारित होता है 
Prashant Kumar 
और यह बात हम अपनी तरफ से नहीं कह रहे है बल्कि दर्शन उपनिषद् ही ऐसा कहते है 

छान्दोग्य उपनिषद् ही देख लीजिए 

जिसमें 5-10-7 लिखा है कि 

पिछले जन्म के कर्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य जन्म मिलता है और पिछले जन्म के पाप से कुत्ता या चांडाल का जन्म मिलता है

तो कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का मतलब भी यही है कि आपको कौनसे वर्ण में जन्म मिलने वाला है य पिछले जन्म के कर्मों से तय होता है 

गीता 4/13 के अनुसार 

(गुण और कर्मों के विभाग से चातुर्वण्य मेरे द्वारा रचा गया है। )

इसमें भी कर्म की व्याख्या यही है कि 

पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर आपको अच्छे बुरे वर्ण में जन्म मिलेगा। 

यहां कर्म भावी जन्म का कारण मात्र है।

जीवों को कर्म फल भुगतने के लिए ईश्वर उन्हें विभिन्न वर्णों में उत्पन्न करता है 

(यह बात हम नहीं बल्कि आपके दर्शन उपनिषद् कहते है)

No comments:

Post a Comment

टाइगर, Sher,

  संवृतस्मृति अनुसार ज़ब सना टुन्नी लड़कीयों के योनि मे फस्ट टाइम बाल आता है तो मून देवता सेक्स करके चले जाते है ज़ब फस्ट टाइम मेंस आता है तो ...