Wednesday, 10 August 2022

हिंसा।


अगर ऐसी बात पवित्र कुरान में लिखे होते 
मानवता वादी नंगा नाच करते फिरते तब 
कौन कैसा ईश्वर हैं यह जो इंसानों को जंगली जानवरों से खिलाने के बात करता है । 
अथर्ववेद - काण्ड » 11; सूक्त » 10; मन्त्र » 23 
 
 अथर्ववेद भाष्य (पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी) - हिन्दी - Pandit Kshemkarandas Trivedi
 
 पदार्थ -
 (ये) जो (अमित्राः) शत्रु लोग (वर्मिणः) वर्म [कवच विशेष] वाले हैं, (ये) जो (अवर्माणः) विना कर्मवाले हैं, (च) और (ये) जो (वर्मिणः) झिलमवाले हैं। (अर्बुदे) हे अर्बुदि [शूर सेनापति] (तान् सर्वान्) उन सब (हतान्)  मारे गयों को (श्वानः) कुत्ते (भूम्याम्) रणभूमि पर (अदन्तु) खावें ॥२३॥
भावार्थ - शूर सेनापति से मारे गये सब शत्रुओं की लोथों को कुत्ते आदि खावें ॥२३॥

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