Wednesday, 10 August 2022

विवाह प्रकार।

मनुस्मृति में ८ प्रकार का शादी का उल्लेख है इनमें एक हैं राक्षस और असुर विवाह 
जिसमें अगर किसी हिन्नू वीर को किसी के बहन बेटी पसंद आ जाए और लड़की और लड़की के घर वाले राज़ी न हो तो हिन्नू वीर उस लड़की से बलात्कार कर के फिर शादी कर सकते हैं ।
९/१९६,१९७
 (ब्रह्म-दैव-आर्ष-गान्धर्व-प्राजापत्येषु यत् वसु) ब्राह्म, देव, आर्ष, गान्धर्व, प्राजापत्य विवाहों में जो स्त्री को धन प्राप्त हुआ है (अप्रजायाम्+अतीतायाम्) स्त्री के सन्तानहीन मर जाने पर (तत् भर्तुः + एवइष्यते) उस धन पर पति का ही अधिकार माना गया है । 
 ।
 (यत् तु अस्याः) और जो इसे (आसुरादिषु
 विवाहेषु दत्तं धनं स्यात्) 'आसुर' गन्धर्व, राक्षस,
 पैशाच [३.२१] विवाहों में दिया गया धन हो
 (अप्रजायाम्+अतीतायाम्) पत्नी के नि:सन्तान मर
 जाने पर (तत् माता पित्रोः इष्यते) वह धन स्त्री के
 माता-पिता का हो जाता है ॥ विशुद्ध मनुस्मृति ९/१९७॥

 ब्राह्म, देव, आर्ष, गान्धर्व, प्राजापत्य, असुर , राक्षस विवाहों में जो स्त्री को धन प्राप्त हुआ है वो धन ।
 अब देखते हैं असुर और राक्षस विवाह किसे बोलते हैं ?
 ।
 *(लड़ाई करके बलात्कार अर्थात् छीन, झपट वा कपट से कन्या का ग्रहण करना ‘राक्षस’ विवाह कहलाता है। शयन वा मद्यादि पी हुई पागल कन्या से बलात्कार संयोग करना ‘पैशाच विवाह कहलाता है)*
 ।
 
 कन्या अथवा कन्या की जाति वालों को धन देकर कन्या लेना आसुर विवाह कहलाता है। अर्थात लड़की खरीद लें कर विवाह करना 
 
 *हनन, छेदन अर्थात् कन्या के रोकने वालों का विदारण कर क्रोशती, रोती, कंपती और भयभीत हुई कन्या को बलात्कार हरण कर के विवाह करना वह ‘राक्षस विवाह’ ।
 *(सं० वि० विवाह सं०)

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