Tuesday, 9 August 2022

अश्लीलता। - तर्कशील।

वायु पुराण की कहानी।
आशीज और बृहस्पति दो भाई थे। बृहस्पति देवताओं के पुरोहित थे। आशीज ने अपनी पत्नी ममता को गर्भवती किया और तपस्या करने चले गए। बृहस्पति कामातुर होकर ममता से संभोग करना चाहा परंतु ममता ने मना किया क्योंकि उसके गर्भ में ब्रहस्पति के बड़े भाई यानी अपने पति का बच्चा पल रहा था, जो गर्भ में ही वेदों का उच्चारण करता था। ममता जानती थी कि बृहस्पति का वीर्य अमोघ है यानी जहां गिरा वहां बच्चा पैदा होना ही है। बृहस्पति ने ममता से जबरदस्ती संभोग किया लेकिन पेट में पल रहे बच्चे ने बृहस्पति को वीर्य छोड़ने से मना किया, बोला कि गर्भ में दो बच्चों की जगह नहीं है। इससे बृहस्पति नाराज हुआ कि उसने इतने सुखमय अवसर में बाधा पहुंचाई और बच्चे को अंधे होने का  श्राप  दिया। बच्चा दीर्घतमा ऋषि के नाम से मशहूर हुआ। दीर्घ का अर्थ गहरा और तम का अर्थ अंधेरा। जन्म से अंधा।

रुको जरा, सबर करो। आगे कहानी और भी मजेदार है।

दीर्घतमा एक बार जब आश्रम में बैठा था तब एक सांड आया  और श्राद्ध के लिए रखे हुए घास को खाने लगा। अंधे दीर्घतमा ने सांड को दोनों सींगों से पकड़ लिया, बोला कि तुम किसी दूसरे का घास खाकर पाप कर्म कर रहे हो। सांड बोला कि यह पाप कर्म हम पशुओं पर लागू नहीं होता, यही तो हमारा धर्म है। दीर्घतमा ने सांड को छोड़ दिया और खुद पशु धर्म अपना लिया। दीर्घतमा ने अपने छोटे भाई शरदान की पत्नी के साथ जबरदस्ती संभोग किया ( पशु धर्म के अनुरूप )जिससे भाई शरदान नाराज हो गया और अपने बड़े भाई दीर्घत्मा को बक्से में बंद कर के समुंदर में बह जाने के लिय गंगा में छोड़ दिया।

रुको जरा। इतनी भी जल्दी क्या है। सबर करो। आगे कहानी और भी मजेदार है।

विरोचन के पुत्र राजा बलि ने उस बक्से को बाहर निकालकर ऋषि दीर्घतमा को बाहर निकाला और अपनी सेवा से खुश किया। ऋषि ने राजा को वरदान देना चाहा तो राजा ने पुत्र का वरदान मांगा। जैसे व्यास ने पांडू, धृतराष्ट्र और विदुर पैदा किए थे ऐसे ही बली ने अपनी पत्नी सुदेष्णा को ऋषि दीर्घतमा के पास भेजा। लेकिन सुदेष्णा ने ऋषि को बूढ़ा और अंधा जानकर खुद जाना अच्छा नही समझा। अपनी शुद्र नौकरानी को भेज दिया। उस स्त्री से ऋषि दीर्घतमा ने दो पुत्र कक्षिवान और चाक्षुष पैदा किए। बलि ने जब ऋषि से पूछा कि क्या यह मेरे बच्चे हैं। तब ऋषि ने बताया कि तुम्हारी पत्नी ने मेरा अपमान किया और अपनी शुद्र नौकरानी को मेरे पास भेजा। 

बली ने फिर अपनी पत्नी सुदेष्णा को ऋषि दीर्घतमा के पास भेजा।

रुको जरा, सबर करो। इससे आगे कहानी और भी मजेदार है, ब्लू फिल्मों की तरह।

सुदेष्णा को ऋषि दीर्घत्मा ने कहा कि मेरे नंगे शरीर पर नमक मिले हुए दही मल कर अपनी जीभ से मेरे पैर से माथे तक सभी अंगों को बिना किसी घृणा से चाटो तब तुम्हे मनचाही संतान मिलेगी।

सुदेष्णा ने ऐसे ही किया परंतु गुदा ( मल त्यागने की जगह ) को नहीं चाटा। दीर्घतमा ने रानी सुदेष्णा को कहा कि तुमने जो गुदा को न चाटने का अपराध किया है उसके लिय जो तुम्हारा पुत्र होगा वह बिना गुदा मार्ग के होगा। रानी ने क्षमा मांगी लेकिन ऋषि नहीं माना और बोला कि बिना गुदा के भी काम होता रहेगा, 5 पुत्र होंगे लेकिन सबसे बड़ा बिना गुदा के ही होगा। इस प्रकार राजा बलि ने 5 पुत्र प्राप्त किए।

क्या कहानी को यही खत्म होना चाहिए? रुको। अभी बस थोड़ी सी बाकी है।

सांड आया और ऋषि को बोला कि तुमने जो हमारा पशु धर्म अपनाया उस पर मैं प्रसन्न हुआ और इस खुशी में मैं आपको सूंघ कर आपकी आंखे और बुढ़ापा ठीक कर देता हूं।  और ऐसा किया भी। जवानी वापिस आने पर दीर्घतमा अपने नए नाम गौतम के नाम से मशहूर हुए।

वायु पुराण में जहां यह कहानी लिखी हुई है उसके बाद कुछ ही पन्नो के बाद फिर इसी कहानी को कुछ फर्क से  दोहराया गया है। फर्क ये हैं:-

ब्रहस्पति ने जब अपनी छोटे भाई की पत्नी ममता से संभोग किया तो गर्भस्थ शिशु ने वीर्य छोड़ने को मना किया और अपने दोनो पैरों से रास्ता रोक दिया लेकिन वीर्य दोनो पैरों के बीच में से निकल कर अंदर चला ही गया और बच्चे के रूप में वापिस निकला। लेकिन उसका पालन न तो माता ममता ने किया न पिता ब्रहस्पति ने। यह बच्चा भारद्वाज कहलवाया। दुष्यंत और शकुंतला के बेटे भरत की तीन पत्नियां और 9 बच्चे। सभी बच्चों को मार दिया और भारद्वाज को इसी भरत ने पाला।

नोट :- अगर किसी को शक हो इस कहानी पर तो गूगल पर ऋषि दिर्घतमा लिख कर सर्च करें। मैने भी सबसे पहले यह कहानी गुगल पर पढ़ी थी क्योंकि इसका उल्लेख भीम राव अंबेडकर ने अपनी किताब riddles of hindu धर्म में किया है। फिर मैने वायु पुराण पढ़ा जो 1160 पन्नो का है और 950 नंबर पन्ने पर यह कहानी है। वायु पुराण के अलावा यही कहानी मत्स्य पुराण में भी है। दोनो के पन्ने पोस्ट कर रहा हूं।

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