Tuesday, 9 August 2022

पृथ्वी।आकाश पुत्री।

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पृथ्वी को बैल ने धारण किया हुआ है 

अथर्व वेद 4-11-1 के अनुसार 
पृथ्वी को बैल ने धारण किया हुआ है 

वृषभ रूपी ईश्वर ने पृथ्वी को धारण किया है||1||

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आकाश की पुत्री 

वेदों में आकाश को पुत्री होने का भी दावा किया गया है 

हे आकाश पुत्र उषे आप दीप्ति से सर्वत्र प्रकाशित हो 
ऋग्वेद 1-48-9


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आकाश ब्रह्मा का सिर है  

अथर्व वेद 1-7-32 में द्युलोक को ब्रह्मा का सिर कहा गया है


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पृथ्वी स्थिर है 

अथर्व वेद 6-77-1 के अनुसार पृथ्वी स्थिर है 

सूर्य लोक ठहरा हुआ है, पृथ्वी ठहरी हुई है, यह सब जगत ठहरा हुआ है ||1||

ऐसी ही बात अथर्व वेद 6-44-1 में भी लिखी हुई है 

ठीक यही भाष्य अथर्व वेद के आर्य समाजी भाष्य कार क्षेमकरण दास त्रिवेदी ने भी किया है 

ऋग्वेद 10-89-4 अनुसार इन्द्र ने पृथ्वी को रोखकर रखा है

 इन्द्र अपने कर्मो द्वारा पृथ्वी को रोके हुए है||4||

यजर्वेद 5/16 में भी पृथ्वी को स्थिर कहा गया है 

आप स्वर्ग और पृथ्वी को स्तंभित किए हुए है



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