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पृथ्वी को बैल ने धारण किया हुआ है
अथर्व वेद 4-11-1 के अनुसार
पृथ्वी को बैल ने धारण किया हुआ है
वृषभ रूपी ईश्वर ने पृथ्वी को धारण किया है||1||
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आकाश की पुत्री
वेदों में आकाश को पुत्री होने का भी दावा किया गया है
हे आकाश पुत्र उषे आप दीप्ति से सर्वत्र प्रकाशित हो
ऋग्वेद 1-48-9
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आकाश ब्रह्मा का सिर है
अथर्व वेद 1-7-32 में द्युलोक को ब्रह्मा का सिर कहा गया है
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पृथ्वी स्थिर है
अथर्व वेद 6-77-1 के अनुसार पृथ्वी स्थिर है
सूर्य लोक ठहरा हुआ है, पृथ्वी ठहरी हुई है, यह सब जगत ठहरा हुआ है ||1||
ऐसी ही बात अथर्व वेद 6-44-1 में भी लिखी हुई है
ठीक यही भाष्य अथर्व वेद के आर्य समाजी भाष्य कार क्षेमकरण दास त्रिवेदी ने भी किया है
ऋग्वेद 10-89-4 अनुसार इन्द्र ने पृथ्वी को रोखकर रखा है
इन्द्र अपने कर्मो द्वारा पृथ्वी को रोके हुए है||4||
यजर्वेद 5/16 में भी पृथ्वी को स्थिर कहा गया है
आप स्वर्ग और पृथ्वी को स्तंभित किए हुए है
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