सोमरस क्या है ?
देसी दारु
सोमरस और देवराज इंद्र
* पुराणों के आधार पर सोमरस केवल देवता लोगो के लिए है , या यह कह सकते है , कि सोमरस पर देवताओं का पूर्णतः देवताओं का अधिकार है , उसी प्रकार देवता में इन्द्र का सबसे उच्च पद है , जिसके फलस्वरूप देवताओं का राजा कहा जाता है , एंव स्वर्ग पर पूर्ण अधिकार जहाँ अनेको दसिया तथा अनेको अप्शराये इन्द्र की सेवा के लिए उपस्थित है ।
सोमरस क्या है ?
* सोमरस आखिर क्या है ? इस पर अनेको विद्वानो ने अपना अलग - अलग मत रखा है । परंतु आज तक कोई सफल न होसका वेदों आदि का अध्ययन करने के पश्चात यह जानकारी प्राप्त होती है , की सोमरस एक नशीली पदार्थ है जो द्रव आदि में रहता था ।
* तथा उसके पान से मनुष्य बे - सूद होता है यह बातें हम कोई हवा - हवाई नही बल्कि तथ्यो के आधार पर कर रहे है जिसका प्रमाण निरुक्त , निघण्टु तथा वेदों के आधार ( सायण भाषय प्रमाणित ) पर कर रहे है ।
निरुक्त और सोमरस
एक॑या प्रति॒धापि॑बत्सा॒कं सरां॑सि त्रिं॒शत॑म् । इन्द्र॒: सोम॑स्य काणु॒का ॥ ( निरुक्त 5 : 11 )
( ऋग्वेद 8 : 77: 4 )
अर्थात : - इन्द्र ने एक सी साँस में एक साथ सोमरस के भरे 30 सरोवरों का पान कर लिया ।
भावर्थ : - निरुक्त के मतानुसार इन्द्र देव ही सोमरस का उत्तराधिकारी है , महर्षि यास्क निरुक्त 5 : 11 की व्याख्या करते हुए समझाते है ।
* काणुका = मन भर कर , सम्पूर्ण इच्छा तक , जब तक पुर्णतः मन प्रशन्न न हो जावे ।
* एक प्रतिधान साँस में पी गया , इन्द्र सोमरस से पूर्ण को मन प्रिय - किनारों तक भरे हुए या इन्द्र के लिए सोम का कांत या प्रेमी है , उसी के लिए ही सोमरस है ।
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रूद्र का ओषधि मूत्र
अथर्व वेद 6-44-3 में रूद्र देवता के मूत्र की प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि उसका मूत्र औषधी और अमृत की तरह है
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रूद्र का ओषधि मूत्र
अथर्व वेद 6-44-3 में रूद्र देवता के मूत्र की प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि उसका मूत्र औषधी और अमृत की तरह है
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