क्या `नियोग´ की व्यवस्था ईश्वर ने दी है?
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क्या `नियोग´ की व्यवस्था ईश्वर ने दी है?
हालाँकि उन्होंने लोगों को दुर्गुणों से दूर रहने की नसीहत करके समाज का कुछ भला किया है लेकिन विधवा औरत और विधुर मर्द को अपने जीवन साथी की मौत के बाद पुनर्विवाह करने से वेदों के आधार पर रोक दिया है और बिना दोबारा विवाह किये ही दोनों को `नियोग´ द्वारा सन्तान उत्पन्न करने की व्यवस्था दी है। इस सम्बंध में सत्यार्थप्रकाश के चतुर्थसमुल्लास में पृष्ठ संख्या 73 से 81 तक पूरे 9 पृष्ठों में वेदमन्त्रों सहित पूर्ण विवरण दिया गया है। स्वामीजी के अनुसार एक विधवा स्त्री बच्चे पैदा करने के लिए वेदानुसार दस पुरूषों के साथ `नियोग´ कर सकती है और ऐसे ही एक विधुर मर्द भी दस स्त्रियों के साथ `नियोग´ कर सकता है। बल्कि यदि पति बच्चा पैदा करने के लायक़ न हो तो पत्नि अपने पति की इजाज़त से उसके जीते जी भी अन्य पुरूष से `नियोग´ कर सकती है। स्वामी जी को इसमें कोई पाप नज़र नहीं आता।
(28) क्या वाक़ई ईश्वर ऐसी व्यवस्था देगा जिसे मानने के लिए खुद वेद प्रचारक ही तैयार नहीं हैं?
ऐसा लगता है कि या तो वेदों में क्षेपक हो गया है या फिर `नियोग´ की वैदिक व्यवस्था किसी विशेष काल के लिए थी, सदा के लिए नहीं थी । ईश्वर की ओर से सदा के लिए किसी अन्य व्यवस्था का भेजा जाना अभीष्ट था। कौन सी व्यवस्था? पुनर्विवाह की व्यवस्था।
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सत्यारथ प्रकाश समुल्लास 4
पेज नंबर 114
जो नियोग नही करेगा वो पापी हैं ,,,
जो कोई नियोग रुकेगा वो पापी हैं ,
कहा पापी सार्य समाजियों आओ यहां
आपने गुरु घंटाल का ज्ञान को डिफेंड करो यहां
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