Tuesday, 9 August 2022

पिता पुत्री - तरकशील।

पिछली पोस्ट मेरी यम और यमी भाई बहन के संवाद की थी, उसमे मैने लिखा था की अगली पोस्ट मेरी ऋग्वेद से ही पिता पुत्री के संबंधी होगी। लिजिए प्रस्तुत है:-
मैं दो ऋग्वेद के पन्ने पोस्ट करूंगा। इसमें से एक ( दूसरी वाली) मोदी सरकार द्वारा अंड भत्तों का मानसिक शोषण करने के लिए नई सरकारी वेबसाइट वैदिक हेरिटेज बनवाई है, वहां से लिए हैं।

पहला ऋग्वेद मंत्र 5:-
प्रजापति का पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ वीर्य सर्वोत्तम प्रजापति ने अपने उस मानव हितकारी वीर्य का त्याग किया, जिसे उन्होंने अपनी सुंदर उषा में सिंचित किया था। (मंत्र 5)

दूसरा ऋग्वेद सरकारी वेबसाइट वाला ( मंत्र 5):-
जिस प्रजापति का इच्छा शक्ति युक्त वीर्य प्रसिद्ध है (जिससे वीर ही उत्पन्न होते हैं, प्रजापति ने संतति निर्माण के लिए, उसका सेक किया, उसे मनुष्यों के हित के लिए ही त्यागा था पुन: वह उसे धारण करता है) जो सर्वश्रेष्ठ प्रजापति अपनी सुंदर कन्या उषा के गर्भ में रखता है

पहला ऋग्वेद मंत्र 6:-

जिस समय पिता ने अपनी युवती कन्या के साथ यथेच्छ कर्म किया। उस समय उनके संभोग कर्म के समीप ही थोड़ा वीर्य गिरा परस्पर अभिगमन करते हुए दोनों ने वह वीर्य यज्ञ के ऊंचे स्थान योनि में छोड़ा था।

दूसरा ऋग्वेद सरकारी वेबसाइट वाला ( मंत्र 6):-
जिस समय युक्ति कन्या उषा में अभिलाषा करते हुए पिता उन दोनों का आकाश में समीप ही जो संगमन हुआ, उस समय अल्प वीर्य का सेक हुआ। परस्पर संगमन करते हुए प्रजापति ने यज्ञ के आधार स्वरूप एक उच्चतम स्थान में उसका सिंचन किया - उससे रूद्र उत्पन्न हुआ।

पहला ऋग्वेद मंत्र 7:-
जिस समय पिता ने अपनी पुत्री के साथ संभोग किया. उस समय धरती से मिलकर वीर्य त्याग किया। शोभन कर्म वाले देवों ने उसी वीर्य से व्रतरक्षक देव वास्तोष्ती का उत्पादन किया।

दूसरा ऋग्वेद सरकारी वेबसाइट वाला ( मंत्र 7):-

जिस समय पिता प्रजापति अपनी कन्या उषा के साथ संगम हुआ उस समय पृथ्वी के साथ मिलकर उसने वीर्य सिंचन किया। तभी उत्तम कर्म करने वाले देवों ने ब्रह्मा को उत्पन्न किया। सब कार्यों के रक्षक वास्तोष्ती यज्ञ के पालक का निर्माण किया।

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