ऋग्वेद 10:71:1
बृह॑स्पते प्रथ॒मं वा॒चो अग्रं॒ यत्प्रैर॑त नाम॒धेयं॒ दधा॑नाः । यदे॑षां॒ श्रेष्ठं॒ यद॑रि॒प्रमासी॑त्प्रे॒णा तदे॑षां॒ निहि॑तं॒ गुहा॒विः ॥
का हिंदी अनुवाद इस प्रकार है_
बृहस्पति ने सबसे पहले भगवान के वचन बोले, जिन्होंने उन्हें प्रैरात का नाम दिया। उनमें से जो सबसे अच्छा था, जो कुछ भी उनके दुश्मन का जीवन था, वह गुफा में छिपा हुआ था।
भाष्यकारो ने अर्थ का अनर्थ कर दिया है
वेद मे जियान विज्यान खोजने के चक्कर में।
Kaling Yodha आर्या प्रीति क्षत्राणी शिवालिका राजपूत Alok Kujur Panchvedi
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विषय - गर्भाधान का उपदेश।
शमीम् । अश्वत्थ: । आऽरूढ: । तत्र । पुम्ऽसुवनम् । कृतम् । तत् । वै । पुत्रस्य । वेदनम् । तत् । स्त्रीषु । आ । भरामसि ॥११.१॥
अथर्ववेद - काण्ड » 6; सूक्त » 11; मन्त्र » 1
अथर्ववेद भाष्य (पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी) - हिन्दी - Pandit Kshemkarandas Trivedi
पदार्थ -
(अश्वत्थः) बलवानों में ठहरनेवाला पुरुष (शमीम्) शान्तस्वभाव स्त्री के प्रति (आरूढः) आरूढ हो चुकता है, (तत्र) उस काल में (पुंसुवनम्) सन्तान का उत्पत्तिकर्म (कृतम्) किया जाता है। (तत्) वह कर्म (वै) हा (पुत्रस्य) कुलशोधक संतान की (वेदनम्) प्राप्ति का कारण है, (तत्) उस कर्म को (स्त्रीषु) स्त्रियों में (आभरामसि) हम पहुँचाते हैं ॥१॥
भावार्थ - वीर्यवान् पति और शान्तस्वभाव पत्नी यथाविधि परस्पर संयोग करके सन्तान उत्पन्न करें ॥१॥ इस सूक्त का विधान पुंसवनसंस्कार में भी दयानन्दकृत संस्कारविधि में है ॥
वेदों के अनुसार
पति और पत्नी के संयोग से पत्नी प्रेगनेंट होती है।
लेकिन
वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 16 में
राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या खीर खाने से प्रेगनेंट हो गई
ऐसे कैसे??????
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