Thursday, 2 February 2023

अम्बेडकर।

भारतरत्न डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी ने मौजूदा मुसलमानों के अंदर पाए जाने वाले खामियों को दर्शाया है, जो सभी मुसलमानों के लिए विचारणीय है कि इसमें कितनी वास्तविकता है👇
"मुसलमानों में इन बुराइयों का होना दुखद है किंतु उससे भी अधिक दुखद तथ्य यह है कि भारत के मुसलमानों में समाज-सुधार हेतु इन बुराइयों का सफलतापूर्वक उन्मूलन के लिए कोई संगठित आंदोलन नहीं उभरा। हालांकि हिंदुओं में भी अनेक सामाजिक बुराइयां हैं परंतु संतोषजनक बात यह है कि उनमें से अनेक इनकी विद्यमानता के प्रति सजग हैं और उनमें से कुछ उन बुराइयों के उन्मूलन हेतु सक्रिय तौर पर आंदोलन भी चला रहे हैं। दूसरी ओर, मुसलमान यह महसूस ही नहीं करते कि ये बुराइयां हैं। परिणामतः वे उनके निवारण हेतु सक्रियता भी नहीं दर्शाते। इसके विपरीत, अपनी मौजूदा प्रथाओं में किसी भी परिवर्तन का विरोध करते हैं।"
            - पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन, सफा 233.
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मेरे ख्याल से आज हर मोलवी मुफ्ती को बैठकर डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की इस बात को गंभीरता से लेकर विचार करना चाहिए।

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