श्री रुद्र संहिता प्रथम अध्याय
द्वादश ज्योतिर्लिंग एवं उपलिंगों की महिमा😁😁
निर्विकार होते हुए भी जो अपनी माया से विराट विश्व का आकार धारण करते हैं, स्वर्ग और मोक्ष जिनकी कृपा से वैभव माने जाते हैं, जिन्हें मुनिजन सदा अपने हृदय में अद्वितीय आत्मज्ञानानंद रूप में देखते हैं, उन दिव्य तेज में से संपन्न भगवान शिव शंकर, जिनका आधा शरीर शैलराज पुत्री देवी पार्वती से सुशोभित है। उन्हें सदैव मेरा नमस्कार है।🙄🙄😎😎
• जिसकी कृपापूर्ण चितवन सुंदर है, जिनका मुख सदैव मंद मुस्कान की छटा से मनोहर है, चंद्रमा की कलाएं जिनके स्वरूप को निर्मल उज्ज्वल करती है, जो त्रितापों (आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक) को शांत करते हैं, जिनका स्वरूप सच्चिन्मय एवं परमानंद रूप से प्रकाशित होता है, जो सदा गिरिजानंदिनी पार्वती के साथ विराजते हैं, वे शिव नामक तेज पुंज सबका मंगल करें।
मुनियों ने सूत जी से कहा- है सूत जी आपने लोकहित की कामना से भगवान शिव की परम पवित्र अनेक कथाएं सुनाई हैं। शिवजी के माहात्म्य की कथारूपी अमृत का पान करते. करते भला कौन पुरुष कृपा हो सकता है? मुने। आप इस जगत के मंगल के लिए पृथ्वी के तीर्थ स्थानों में श्रेष्ठ व प्रसिद्ध शिवलिंगों की कथा का वर्णन कीजिए।
मुनियों के प्रश्नों को सुनकर महाज्ञानी सूत जी बोले- हे ऋषियों! आपने संसार के हित की कामना से बड़ा सुंदर प्रश्न किया है। आपकी भगवान शिव में अगाध भक्ति और उनकी कथा में महान रुचि है। आपकी इच्छा के अनुसार मैं आपको शिवजी की उत्तम कथा सुनाता हूं। भगवान शिव के लिंगों की गणना तो असंभव है। उनके असंख्य लिंग पूरे ब्रह्मांड में फैले हुए हैं। अब मैं आपको मुख्य लिंगों की कथा सुनाता हूं। सौराष्ट्र में सोमनाथ जी, श्री शैल में मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकालेश्वर, ओंकार जी में
परमेश्वर, हिमालय पर्वत पर केदार, डाकिनी देश में भीमशंकर, काशी में विश्वनाथ जी, गोमती नदी के तट पर त्रयंबकेश्वर, सेतुबंध में रामेश्वर एवं शिवालय में घुश्मेश्वर नामक बारह ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं। जो मनुष्य प्रातः उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों का स्मरण कर पूजन व उपासना करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सभी कामनाएं एवं मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं इन ज्योतिर्लिंगों पर चढ़ा हुआ नैवेद्य का प्रसाद ग्रहण करने से मनुष्यों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा समस्त भोगों को भोगकर वह मोक्ष को प्राप्त होता है। निम्न जाति का कोई व्यक्ति यदि किसी लिंग का दर्शन कर ले तो वह उच्च कुल में जन्म लेता है। इन बारह ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन स्वयं ब्रह्माजी, श्रीहरि विष्णु तथा अन्य देवता भी नहीं
कर सकते। धरती और समुद्र के मिलने वाले स्थान पर सोमेश्वर जी का अन्नकेश नामक लिंग है।
मल्लिकार्जुन से प्रकट रुद्रेश्वर नामक उपलिंग जग प्रसिद्ध है और भृगु में स्थित है। नर्मदा नदी के तट पर स्थित महाकाल शिवलिंग का दुग्धेश नामक उपलिंग है, जो सुख देने वाला है। इसी प्रकार ओंकारेश्वर का उपलिंग कर्दमेश्वर नाम से बिंदु सरोवर के तट पर है। केदारेश्वर का उपलिंग भूतेश्वर नाम से यमुना नदी के तट पर है। यह पापों का नाश करता है। भीमेश्वर उपलिंग भीमशंकर नामक ज्योतिर्लिंग का है और सह्य पर्वत पर स्थित है। नागेश्वर का उपलिंग मल्लिका सरस्वती तट पर भूतेश्वर नाम से स्थित है और रामेश्वर में घुश्मेश्वर लिंग के
उपलिंग के रूप में व्याघ्रेश्वर लिंग स्थित है। इस प्रकार मैंने आपको बारह ज्योतिर्लिंगों और उपलिंगों के बारे में बताया। इनके दर्शनों
से समस्त मनोरथ सिद्ध होते हैं।😂😂😃
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अन्धकार का कारण
ऋग्वेद 1-115-4 के अनुसार सूर्य जब हरित नाम के सात घोड़ों को रथ से अलग करता है तब अंधेरा याने रात्रि होती है
तो ये थे वेदों कि कुछ विज्ञान विरोधी बाते, ये बहुत ही थोड़े उदाहरण हैं ऐसी विज्ञान विरोधी बाते आपको हर वेद में जगह जगह मिलेगी
इस तरह से हम देखते है की वेदों में विज्ञान तो नहीं लेकिन विज्ञान विरोधी बाते जरूर है।
लेकिन 99.9% लोगों ने वेद ना पढ़े होने के कारण धर्म का मार्केटिंग करने वाले लोग वेदों में विज्ञान होने का दावा करते है ताकि पढ़े लिखे लोग भी गर्व के साथ अपने धर्म को चिपके रहे।
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शिवलिंग शंकर का गुप्तांग हि है
बहोत सारे लोग अपने धर्म कि अश्लिलता छिपाने के लिए दावा करते है शिवलिंग शिवजी का गुप्तांग नही है. यहा लिंग का अर्थ प्रतिक या चिन्ह है. इस दुष्प्रचार के लिए बहोत सारे लेख लिखे गये है, युट्युब पर व्हिडीओ बनाये गये है. कुछ युट्युब चॅनल्स तो ने शिवलिंग को सायन्स के साथ हि जोड दिया. इसलिए इस दुष्प्रचार का खंडन करना हमे आवश्यक लगा.
अगर लिंग का अर्थ प्रतिक या चिन्ह है तो इसका नाम भि शिव प्रतिक या शिव चिन्ह होना चाहिये था.
असल मे शिवलिंग शंकर का गुप्तांग हि है
ये बात हम नही ब्राह्मणो के हि पुराणो मे लिखी है.
#शिवपुराण
शिवपुराण मे शिवलिंग स्थापना कि एक कथा है
कथा के अनुसार
दारु नाम के वन मे शिवभक्त ब्राह्मण रहते थे वे एक बार लकडियां चुनने के लिए वन को गये.
उतने मे वहा शिवजी आ गये जोकी नंगे थे और हाथ मे अपना लिंग पकडे हुये थे.
उनको देखकर ऋषींओ कि पत्नीया भयभित,व्याकुल,हैरान हो गयी. कई अलिंगन करने लगी.
उतने मे वहा ऋषी महात्मा आ गये क्रोध मे उन्होंने श्राप दिया कि तुम्हारा लिंग पृथ्वी पर गिर पडे. और वैसा हि हुआ.
वो लिंग जहा भी जाता सब कुछ जलकर भस्म हो जाता.
तब उन ऋषी महात्माओ ने ब्रह्माके कहने पर पार्वती कि आराधना कि.
पार्वतीने योनीरुप धारण करके उस लिंग को अपने अंदर स्थापित कर लिया.
(शिवपुराण, कोटीरुद्रसंहिता 4, अध्याय 12)
क्या कहते हो पंडो क्या अब भी शिवलिंग को प्रतिक या चिन्ह हि कहोगे ?
कथा से स्पष्ट है कि पार्वतीने अपनी योनी मे शंकर के लिंग को स्थापित करके रखा है.
#भविष्य_पुराण
भविष्य पुराण मे भी शिवलिंग पर एक कथा है. कथा के अनुसार
एक बार ब्रह्मा विष्णु और महेश अत्रि ऋषी कि पत्नी अनुसया के पास गये. और उनकी सुंदरता पर मंत्रमुग्ध हो कर उनसे कहने लगे हे मदभरे नेत्रो वाली सुंदरी ! तुम हमे रति प्रदान करो
अन्यथा हम यही तुम्हारे सामने अपने प्राण त्याग देंगे.
पतीव्रता अनुसया ने तिनो को मना कर दिया.
तब शिवजी अपना लिंग हाथ मे पकड लिये और विष्णु उसमे रसवृद्धी करने लगे, तथा ब्रह्मा भी कामपिडीत होकर अनुसया पर टूट पडे.
जब तिनो जबरन अनुसया को मैथुनार्थ पकडने लगे तब उसने तिनो को श्राप दिया तुम तिनो ने मेरा पतिव्रता धर्म भंग करने कि चेष्टा कि है इसलिए महादेव का लिंग विष्णु के चरण और ब्रह्मा का सिर हमेशा उपहास के कारण बनेंगे
(भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व खंड 4,अध्याय 17 श्लोक 67-82,
हिंदी साहित्य प्रकाशन,प्रयाग)
इन दोनो अश्लिल कथाओ से बिलकुल स्पष्ट है कि शिवलिंग शिवजी का प्रतिक या चिन्ह नही बल्की गुप्तांग हि है.
21 वी सदी मे किसी के लिंग कि पुजा करना बहोत हि मुर्खतापुर्ण बात है. लेकिन अपने धर्म कि दुकानदारी चलती रहे इसलिए पंडे शिवलिंग कि सच्चाई लोगों के सामने आने नही देते
पुष्टि की है।
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चंद्र पानी पर दौड़ता है
विज्ञान तो नहीं सेक्स है किताब
अथर्व वेद 18-4-89 के अनुसार चंद्र पानी पर दौड़ता है
चंद्र लोक जलो के भीतर सूर्य प्रकाश में दौड़ता रहता है||89||
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अन्धकार का कारण
ऋग्वेद 1-115-4 के अनुसार सूर्य जब हरित नाम के सात घोड़ों को रथ से अलग करता है तब अंधेरा याने रात्रि होती है
तो ये थे वेदों कि कुछ विज्ञान विरोधी बाते, ये बहुत ही थोड़े उदाहरण हैं ऐसी विज्ञान विरोधी बाते आपको हर वेद में जगह जगह मिलेगी
इस तरह से हम देखते है की वेदों में विज्ञान तो नहीं लेकिन विज्ञान विरोधी बाते जरूर है।
शिवलिंग शंकर का गुप्तांग ling है
20/04/2022
बहोत सारे लोग अपने धर्म कि अश्लिलता छिपाने के लिए दावा करते है शिवलिंग शिवजी का गुप्तांग नही है. यहा लिंग का अर्थ प्रतिक या चिन्ह है. इस दुष्प्रचार के लिए बहोत सारे लेख लिखे गये है, युट्युब पर व्हिडीओ बनाये गये है. कुछ युट्युब चॅनल्स तो ने शिवलिंग को सायन्स के साथ हि जोड दिया. इसलिए इस दुष्प्रचार का खंडन करना हमे आवश्यक लगा.
अगर लिंग का अर्थ प्रतिक या चिन्ह है तो इसका नाम भि शिव प्रतिक या शिव चिन्ह होना चाहिये था.
असल मे शिवलिंग शंकर का गुप्तांग हि है
ये बात हम नही ब्राह्मणो के हि पुराणो मे लिखी है.
#शिवपुराण
शिवपुराण मे शिवलिंग स्थापना कि एक कथा है
कथा के अनुसार
दारु नाम के वन मे शिवभक्त ब्राह्मण रहते थे वे एक बार लकडियां चुनने के लिए वन को गये.
उतने मे वहा शिवजी आ गये जोकी नंगे थे और हाथ मे अपना लिंग पकडे हुये थे.
उनको देखकर ऋषींओ कि पत्नीया भयभित,व्याकुल,हैरान हो गयी. कई अलिंगन करने लगी.
उतने मे वहा ऋषी महात्मा आ गये क्रोध मे उन्होंने श्राप दिया कि तुम्हारा लिंग पृथ्वी पर गिर पडे. और वैसा हि हुआ.
वो लिंग जहा भी जाता सब कुछ जलकर भस्म हो जाता.
तब उन ऋषी महात्माओ ने ब्रह्माके कहने पर पार्वती कि आराधना कि.
पार्वतीने योनीरुप धारण करके उस लिंग को अपने अंदर स्थापित कर लिया.
(शिवपुराण, कोटीरुद्रसंहिता 4, अध्याय 12)
क्या कहते हो पंडो क्या अब भी शिवलिंग को प्रतिक या चिन्ह हि कहोगे ?
कथा से स्पष्ट है कि पार्वतीने अपनी योनी मे शंकर के लिंग को स्थापित करके रखा है.
#भविष्य_पुराण
भविष्य पुराण मे भी शिवलिंग पर एक कथा है. कथा के अनुसार
एक बार ब्रह्मा विष्णु और महेश अत्रि ऋषी कि पत्नी अनुसया के पास गये. और उनकी सुंदरता पर मंत्रमुग्ध हो कर उनसे कहने लगे हे मदभरे नेत्रो वाली सुंदरी ! तुम हमे रति प्रदान करो
अन्यथा हम यही तुम्हारे सामने अपने प्राण त्याग देंगे.
पतीव्रता अनुसया ने तिनो को मना कर दिया.
तब शिवजी अपना लिंग हाथ मे पकड लिये और विष्णु उसमे रसवृद्धी करने लगे, तथा ब्रह्मा भी कामपिडीत होकर अनुसया पर टूट पडे.
जब तिनो जबरन अनुसया को मैथुनार्थ पकडने लगे तब उसने तिनो को श्राप दिया तुम तिनो ने मेरा पतिव्रता धर्म भंग करने कि चेष्टा कि है इसलिए महादेव का लिंग विष्णु के चरण और ब्रह्मा का सिर हमेशा उपहास के कारण बनेंगे
(भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व खंड 4,अध्याय 17 श्लोक 67-82,
हिंदी साहित्य प्रकाशन,प्रयाग)
इन दोनो अश्लिल कथाओ से बिलकुल स्पष्ट है कि शिवलिंग शिवजी का प्रतिक या चिन्ह नही बल्की गुप्तांग हि है.
21 वी सदी मे किसी के लिंग कि पुजा करना बहोत हि मुर्खतापुर्ण बात है. लेकिन अपने धर्म कि दुकानदारी चलती रहे इसलिए पंडे शिवलिंग कि सच्चाई लोगों के सामने आने नही देते
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शिव के वीर्य से सोने चांदी की उत्पत्ति
Sex book
भागवत पुराण में शिव और मोहिनी की कथा आती है जिसने अनुसार मोहिनी के पीछे भागते हुए शंकर का वीर्य स्खलित हो गया था
तस्यानुधावतो रेतश्चस्कंदामोघरेतसः , शुष्मिणो यूथपस्येव वासितामनु धावतः . यत्र यत्रापतन्मह्यां रेतस्तस्य महात्मनः , तानि रूप्यस्य हेम्नश्च क्षेत्राण्यासन्महीपते .
भागवत पुराण 8-12-32,33
अर्थात : कामुक हथिनी के पीछे दौड़ने वाले मदोन्मत्त हाथी के समान वह मोहिनी के पीछेपीछे दौड़ रहे थे . यद्यपि शंकर का वीर्य अमोघ है , फिर भी मोहिनी की माया से वह स्खलित हो गया . शंकर का वीर्य पृथ्वी पर जहांजहां गिरा , वहांवहां सोनेचांदी की खानें बन गईं .
लगता है , भागवतकार एक नंबर का गपोड़ी था . वीर्य से सोनेचांदी की खानें नहीं बन सकतीं . क्या पौराणिक लोग सिद्ध कर सकते हैं कि शिव के वीर्य से सोनेचांदी की खानें कैसे बन गईं ?
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अन्धकार में छुपा हुआ सूर्य
Sex book and Vedic science book
ऋग्वेद 3-49-5 के अनुसार इन्द्र जब गौओ को खोजने निकले तब गहन अन्धकार में छुपे हुए प्रकाश पुंज सूर्य को प्राप्त किया
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सूर्य के सात घोड़े
ऋग्वेद 1-50-8 के अनुसार सूर्य हरित नाम के 7 घोड़ों के रथ में बैठकर गमन करता है
यही बात ऋग्वेद 4-45-6 में भी लिखी हुई है
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Sexx book and science book
सूर्य चंद्र एक दूसरे का पीछा करते है
अथर्व वेद 7-81-1 के अनुसार चंद्र सूर्य एक दूसरे का पीछा करते है
दो बालक( सूर्य और चन्द्र) क्रीड़ा करते हुए, एक दूसरे का पीछा करते हुए समुद्र तक पहुंचते है||1||
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