अर्थ का अनर्थ करने वाले #दयानंद चाचा का ज्ञान......
दया... चाचा ने यजुर्वेद 31:9 का भाष्य किया है
जिसमे अग्रत: का शब्दार्थ #सृष्टि_से_पुर्व 🤣 किया है
चलो मान लिए है ज्ञानी लोग सृष्टि के पुर्व प्रसिद्ध हुए
तब
★ वह ज्ञानी लोग किस दुनिया में प्रसिद्ध हुए ?????
आर्या प्रीति क्षत्राणी शिवालिका राजपूत
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यजुर्वेद अध्याय 16 मंत्र 21 में
वैदिक ईश्वर के उपदेश 😃😃😂
कहते हैं जब अपने घर खुद कांच से बना हुआ हो तो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं चलाया करते हैं 😁😁
चोरी करने वाले और चोरी से जीने वालों के वैदिक ईश्वर के उपदेश 😃😃 इनको बज्र से मारो 😅😁😁
राजपुरुष (वञ्चते) छल से दूसरों के पदार्थों को हरने वाले (परिवञ्चते) सब प्रकार कपट के साथ वर्त्तमान पुरुष को (नमः) वज्र का प्रहार और (स्तायूनाम्) चोरी से जीने वालों के (पतये) स्वामी को (नमः) वज्र से मारें (निषङ्गिणे) राज्यरक्षा के लिये निरन्तर उद्यत ( इषुधिमते) प्रशंसित बाणों को धारण करने हारे को (नमः) अन्न देवें (तस्कराणाम्) चोरी करने हारों को (पतये) उस कर्म में चलाने हारे को (नमः) वज्र और (सृकायिभ्यः) वज्र से सज्जनों को पीडित करने को प्राप्त होने और (जिघांसद्भ्यः) मारने की इच्छा वालों को (नमः) वज्र से मारें (मुष्णताम्) चोरी करते हुओं को (पतये) दण्डप्रहार से पृथिवी में गिराने हारे का (नमः) सत्कार करें (असिमद्भ्यः) प्रशंसित खड्गों के सहित (नक्तम्) रात्रि में (चरद्भ्यः) घूमने वाले लुटेरों को (नमः) शस्त्रों से मारें और (विकृन्तानाम् ) विविध उपायों से गांठ काट के पर-पदार्थों को लेने हारे गठिकठों को (पतये) मार के गिराने ↑ हारे का (नमः) सत्कार करें ॥ २१ ॥😃😃😁😁
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तं बृ॒हच्च॑रथन्त॒रं चा॑दि॒त्याश्च॒ विश्वे॑ च दे॒वा अ॑नु॒व्यचलन् ॥
अथर्ववेद - काण्ड » 15; सूक्त » 2; मन्त्र » 2
अथर्ववेद भाष्य (पण्डित क्षेमकरणदास त्रिवेदी) - हिन्दी - Pandit Kshemkarandas Trivedi
पदार्थ -
(बृहत्) बृहत् [बड़ाआकाश] (च च) और (रथन्तरम्) रथन्तर [रमणीय गुणों द्वारा पार होने योग्य जगत्] (च)और (आदित्याः) सब चमकनेवाले सूर्य आदि (च) और (विश्वे) सब (देवाः) गतिवाले लोक (तम्) उस [व्रात्य परमात्मा] के (अनुव्यचलन्) पीछे-पीछे विचरे
दयानंद सरस्वती कि तरह ही सभी वेद भाष्य कारों ने अर्थ का अनर्थ कर दिया है
जो शब्द मंत्र में नहीं है
मनगढ़ंत शब्द का अर्थ घुसा दिया है
उदाहरण हेतु_
★#तम् शब्द मंत्र में नहीं है लेकिन क्षेमकरण चाचा ने तम् शब्द पदार्थ में घुसा कर उसका अर्थ उस लगा दिया है
★#व्रात्य_परमात्मा शब्द पता नहीं कहां से पदार्थ में जो दिया।
#इत्यादि
इस मंत्र का सही मायने में हिंदी अनुवाद देखें तो कुछ इस प्रकार होगा—
तं बृ॒हच्च॑रथन्त॒रं चा॑दि॒त्याश्च॒ विश्वे॑ च दे॒वा अ॑नु॒व्यचलन् ॥
उनके महान रथ में सूर्य और अन्य सभी देवता उनके पीछे-पीछे चलते थे।
चलो मुद्दे पर आते हैं
हिन्दू स्कालर के वेद भाष्य पर
#टुन्नी #आर्य #पंथी
हमेशा बाइबल पर आरोप लगाते है कि बाइबल में पृथ्वी ऐसी है वैसी है , सूर्य इसका चक्कर लगाता है
जबकि यह झुठ है बाइबल में ऐसा कहीं नहीं लिखा है।
लेकिन वेद में वैदिक भाष्य कार क्या पेश करते हैं
इस पोस्ट में दो लोगों का भाष्य पेश किया गया है
एक फोटो में और एक टेक्स्ट के रूप में लिख कर
#दोनों #भाष्यकारों #ने #लिखा #है
#सूर्य #चलता #है
और टुन्नी पंथी आर्य हमेशा वेद में सांइस दिखाने का प्रयास करते हैं
तब आर्य पंथियों यह कौन सा साइंस है
♦सूर्य चलता है????
Mahendra Pal Arya आचार्य अग्निव्रत वैदिक जागृति कन्या गुरुकुल
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अ꣣भ्या꣢र꣣मि꣡दद्र꣢꣯यो꣣ नि꣡षि꣢क्तं꣣ पु꣡ष्क꣢रे꣣ म꣡धु꣢ । अ꣣व꣡ट꣢स्य वि꣣स꣡र्ज꣢ने ॥१६०३॥
सामवेद मंत्र संख्या - 1603
पदार्थ -
अग्नि नामक परमात्मा की ही महिमा से (अद्रयः) बादल(अभ्यारम् इत्) आपस में टकराते हैं। तब (अवटस्य) मेघरूप जलभण्डार के (विसर्जने) बरसने पर (पुष्करे) भूमि के सरोवर में (मधु) मधुर वर्षा-जल (निषिक्तम्) सिंच जाता है
समीक्षा-
आर्य समाजी कहते हैं कि हम एक परमात्मा का पुजा करते हैं
और उसका नाम ओम् बताते हैं जबकि यजुर्वेद में ओम् किसी परमात्मा के नाम के लिए नहीं है
और सामवेद में लिखा है
अग्नि नामक परमात्मा इससे स्पष्ट होता है कि वेद में एक से अधिक परमात्मा है।
★ अग्नि नामक परमात्मा के अलावा वेद में और कितने परमात्मा है?
★ क्या बादल आपस में टकराने से बारिश होता हैं?
★ क्या अग्नि नामक परमात्मा के बिना महिमा का बारिश नहीं होगा?
★ चेरापूंजी और मांसिराम में किस परमात्मा के महिमा से बारिश होता है?
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जानवरों के साथ सेक्स
यजुर्वेद भाष्य 21/60 में लिखते है
वैदिक ईश्वर का आदेश
हे मनुष्यों ! प्राण और अपान के लिए दुःख विनाश करने वाले छेरी आदि पशु से , वाणी के लिए मेंढा ( मेंढक ) से , और परम ऐश्वर्य के लिए बैल से भोग करें "
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