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वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग 76
परशुराम ने कश्यप से प्रतिज्ञा किया था कि रात में पृथ्वी पर नहीं रहेंगे
और वह किसी महेंद्र पर्वत पर रहते थे
★ महेंद्र पर्वत यदि पृथ्वी पर नहीं तो कहा था?
★ महेंद्र पर्वत पृथ्वी से कितना था?
जवाब जरूर दें।
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युजुर्वेद 26/2
वेदिक ईश्वर का स्त्री और सेवक भी है
,
अथर्ववेद 4/1/6
वेदिक ईश्वर प्रलय के समय सोता हुआ था 🤣
फिर वो जगा और श्रृष्टि रच दी
,
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* जो वेदो को नहीं मानते उनका घर नष्ट हो जाता है और महादुःख को प्राप्त होता है
( अथर्ववेद १२ :४ :३ )
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ब्राह्मणों या वैदिक ईश्वरी का करिश्मा देखो
पहले पार्वती के शरीर से 5kg मैल से बने हुए बच्चे का सिर कटवा दिया फिर उसपे 50kg का हाथी का सिर फिट करवा दिया
और अंत में 50ग्राम के चूहे पर बैठा दिया और भक्तो को 1 ग्राम भी दिमाग इस्तेमाल करने लायक नही छोडा...🤕😅🤣😂😁😆
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*जिस धर्म के धर्मसास्त्रों में ऐसी बातें लिखी है,
Sex book ke kuchh माजेदार किससे
1 - मेरी शरण में आकर स्त्री ,वैश्य , शूद्र भी जिन कि उत्त्पति पाप योनि से हुई है, परम गति को प्राप्त हो जाते है।
-:भगवत गीता 9-32
2 - शूद्र का प्रमुख कार्य तीनों वर्णो की सेवा करना है।
-: महाभारत 4/50/6
3 - शूद्र को सन्चित धन से स्वामी कि रक्षा करनी चाहिये।
-: महाभारत 12/60/36
4 - शूद्र तपस्या करे तो राज्य निर्धनता में डूब जायेगा।
-: वाo .रामायण 7/30/74
5 - ढोल .गवार .शूद्र पशु नारी |
सकल ताड़ना के अधिकारी ||
-: रामचरित मानस 59/5
6 - पूजिये विप्र सील गुन हीना, शूद्र न गुण गन ग्यान प्रविना।
-:रामचरितमानस 63-1
7- वह शूद्र जो ब्राम्हण के चरणो का धोवन पीता है राजा उससे कर TAX न ले।
-: आपस्तंबधर्म सूत्र 1/2/5/16
8 - जिस गाय का दूध अग्निहोत्र के काम आवे शूद्र उसे न छुये।
- : कथक सन्हिता 3/1/2
9 - शूद्र केवल दूसरो का सेवक है इसके अतिरिक्त उसका कोइ अधिकार नही है।
-: एतरेय ब्राम्हण 2/29/4
1o- यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा दे तो उस ब्राम्हण को चान्डाल की भाँति त्याग देना चाहिये।
-: स्कंद पुरान 10/19
11 - यदि कोइ शूद्र वेद सुन ले तो पिघला हुआ शीशा, लाख उसके कान में डाल देना चाहिये।
यदि वह वेद का उच्चारण करे तो जीभ कटवा देना चाहिये। वेद स्मरण करे तो मरवा देना चाहिये।
-: गौतम धर्म शूत्र 12/6
12 - देव यज्ञ व श्राद्ध में शूद्र को बुलाने का दंड 100 पर्ण।
- : विष्णु स्मृति 5/115
13 - ब्राम्हण कान तक उठा कर प्रणाम करे, क्षत्रिय वक्षस्थल तक, वैश्य कमर तक व शूद्र हाथ जोड़कर एवं झुक कर प्रणाम करे।
-: आपस्तंब धर्म शूत्र 1,2,5,/16
14 - ब्राम्हण की उत्पत्ति देवता से, शूद्रो की उत्पत्ति राक्षस से हुई है।
-: तेत्रिय ब्राम्हण 1/2/6/7
15 - यदि शूद्र जप ,तप, होम करे तो राजा द्वारा दंडनिय है।
-: गौतम धर्म सूत्र 12/4/9
16- यज्ञ करते समय शूद्र से बात नहीं करना चाहिये।
-: शतपत ब्राम्हण
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📖#गायत्री__कोई__मंत्र___नही 📖
बेटी के मना करने पर उसे जिन वाक्यो से पटाया गया उसे मंत्र का नाम देके सत्य पे पर्दा डालने की कोशिश की गई है।
मंत्र - ॐ भू: भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्
प्रत्येक शब्द की अलग-अलग व्याख्या :-
ॐ भूर्भुवः (भुः भुवः), स्वः तत्सवितुर्वरेण्य (तत् सवित उर वरणयं),
भर्गो=भार्गव/भृगु,देवस्य(देव स्य), धीमहि धियो योनः प्र चोद्यात.
ॐ =प्रणव।
भूर = भूमि पर।
भुवः = आसीन / निरापद हो जाना / लेट जाना [(भूर्भुवः=भुमि पर)]।
स्व= अपने आपको।
तत्= उस।
सवित = अग्नि के समान तेज, कान्तियुक्त की।
उर = भुजाओं में।
वरण्यं = वरण करना, एक दूसरे के/ एकाकार हो जाना।
भर्गोः देवस्य = भार्गवर्षि / विप्र (ब्राहमण) के लिये।
धीमहि = ध्यानस्थ होना / उसके साथ एक रूप होना.
( धी =ध्यान करना ),
( महि = धरा, धरती, धरणी, धारिणी के / से सम्बद्ध होना )
धियो = उनके प्रति / मन ही मन मे ध्यान कर / मुग्ध हो जाना / भावावेश क्षमता को तीव्रता से प्रेरित करना।
योनः = योनि / स्त्री जननांग।
प्र = [उपसर्ग] दूसरों के / सन्मुख होना/ आगे करना या होना / समर्पित / समर्पण करना।
चोदयात् = मँथन / मेथुन / सहवास / समागम / सन्सर्ग के हेतु।
सरलार्थ:- हे देवी (गायत्री), भू पर आसीन होते (लेटते) हुए, उस अग्निमय और कान्तियुक्त सवितदेव के समान तेज भृगु (ब्राहमण) की भुजाओं में एकाकार होकर मन ही मन में उन्ही के प्रति भावमय होकर उनको धारण कर लो और पूर्ण क्षमता से अपनी योनि को संभोग (मैथुन) हेतु उन्हें समर्पित कर दो.
वैदिक धर्म का मूल आधार सुरा - सुंदरी, सम्भोग, मांसाहार और युद्ध है। गायत्री मन्त्र सम्भोग मन्त्र है। गायत्री मंत्र को नव योनि मंत्र भी कहते है।
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ये ऐसे सवाल है जो बहुत हि सोचने लायक है। जैसे कि -
1:- सभी देवी देवताओ ने भारत मे हि जन्म क्यो लिया?
क्यो किसी भी देवी देवता को भारत के बाहर कोइ नही जानता ?
2:- जितने भी देवी देवता देवताओ की सवारीया है उनमे सिर्फ वही जानवर क्यो है जो कि भारत मे ही पाये जाते है?
एसे जानवर क्यो नही जो कि सिर्फ कुछ हि देशो मे पाये जाते है, जैसे कि कंगारु, जिराफ आदी !!
3:- सभी देवी देवता हमेशा राज घरानो मे हि जन्म क्यो लेते थे ?
क्यो किसी भी देवी देवता ने किसी गरीब या शुद्र के यहा जन्म नही लिया?
4:- पोराणीक कथाओ मे सभी देवी देवताओ की दिनचर्या का वर्णन है जैसे कि कब पार्वती ने चंदन से स्नान किया, कब गणेश के लिये लड्डु बनाये, गणेश ने कैसे लड्डु खाये.. आदी
लेकीन जैसे हि ग्रंथो कि स्क्रीप्ट खत्म
हो गयी भगवानो कि दिनचर्या भी खत्म..
तो क्या बाद में सभी देवीदेवताऔ का देहांत हो गया ??
अब वो कहाँ है? उनकी औलादे कहाँ है?
5:- ग्रंथो के अनुसार पुराने समय मे सभी देवी देवताओ का पृथ्वी पर आना-जाना लगा रहता था।
जैसे कि किसी को वरदान देने या किसी पापी का सर्वनाश करने..
लेकीन अब एसा क्या हुआ जो देवी देवताओ ने पृथ्वी पर आना बंद
हि कर दिया??
6:- जब भी कोइ पापी पाप फैलाता था तो उसका नाश करने के लिये खुद भागवान किसी राजा के यहा जन्म लेते थे फिर 30-35 की उम्र तक जवान होने के बाद वो पापी का नाश करते थे,
ऐसा क्यों?
पापी का नाश जब भगवान खुद हि कर रहे है तो 30-35 साल का इतना ज्यादा वक्त क्यो???
भगवान सिधे कुछ क्यो नही करते??
जीस प्रकार उन्होने अपने खुद के ही भक्तो का उत्तराखण्ड मे नाश किया ?
(7) अगर हिन्दू धर्म कई हज़ार साल
पुराना है, तो फिर भारत के बाहर इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं हुआ और एक भारत से बाहर के धर्म “इस्लाम-ईसाई” को इतनी मान्यता कैसे हासिल
हुई?
वो आपके अपने पुरातन हिन्दू धर्म से ज़्यादा अनुयायी कैसे बना सका? हिन्दू देवी-देवता उन्हें नहीं रोक रहें??
(8) अगर हिन्दू धर्म के अनुसार एक
जीवित पत्नी के रहते, दूसरा विवाह अनुचित है, तो फिर राम के पिता दशरथ ने चार विवाह किस नीति अनुसार किये थे?
(9) अगर शिव के पुत्र गनेश की गर्दन शिव ने काट दी, तो फिर यह कैसा भगवान है??
जो उस कटी गर्दन को उसी जगह पर क्यों नहीं जोड़ सका??
क्यों एक पिरपराध जानवर (हाथी) की हत्या करके उसकी गर्दन गणेश की धढ पर लगाई?
एक इंसान के बच्चे के धढ़ पर हाथी की गर्दन कैसे फिट आ गयी?
(10) अगर हिन्दू धर्म में मांसाहार वर्जित है, तो फिर राम स्वर्णमृग (हिरन) को मारने क्यों गए थे? क्या मृग हत्या जीव हत्या नहीं है?
(11) राम अगर भगवान है, तो फिर उसको यह क्यों नहीं पता था कि रावण की नाभि में अमृत है?
अगर उसको घर का भेदी ना बताता कि रावण की नाभि में अमृत है, तो उस युद्ध में रावण कभी नहीं मारा जाता।
क्या भगवन ऐसा होता है?
(12) तुम कहते हो कि कृष्ण तुम्हारे भगवन हैं, तो क्या नहाती हुई निर्वस्त्र गोपीयों को छुपकर देखने वाला व्यक्ति, भगवान हो सकता है?
अगर ऐसा काम कोई व्यक्ति आज के दौर में करे, तो हम उसे छिछोरा-नालायक कहते हैं।
तो आप कृष्ण को भगवान क्यों कहते हो?
(13) हिन्दूओ में बलात्कारीयों का प्रमाण अधिक क्यों होते हैं?
(14) शिव के लिंग (पेनिस) की पूजा क्यों करते हैं? क्या उनके शरीर में कोई और चीज़ पूजा के क़ाबिल नहीं?
सिव के 5 पत्नी कियू था
(15) खुजराहो के मंदिरों में काम-क्रीड़ा और उत्तेजक चित्र हैं, फिर ऐसे स्थान को मंदिर क्यों कहा जाता है?
क्या काम-क्रीडा, हिन्दू धर्मानुसार पूजनीय है?
इस बात को सभी को शेयर करो ताकि सभी को पता चले..
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बैल और घोड़ा ब्रह्चाये ( कन्या ) के साथ घास सिंचना ( गर्भधान करना ) चाहता है ।
( अर्थवेद 11 : 5 : 18 )
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कीड़े मारने के उपाय
अथर्व वेद 5-23-5 के अनुसार मंत्रो द्वारा कीड़ों को मारा जा सकता है
किडे ना मारे तो पखनाड की गाओ मार सकते हैं
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आकाश खम्बो पर टिका है
Sex book ka science
ऋग्वेद 10-115-5 के अनुसार इन्द्र ने स्तंभ द्वारा अंतरिक्ष ऊपर धारण किया हुआ है
कीड़े मारने के उपाय
Sex book and.....,
अथर्व वेद 5-23-5 के अनुसार मंत्रो द्वारा कीड़ों को मारा जा सकता है
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हिन्दूओं द्वारा हमेशा मसीहों से यह सवाल पूछा जाता है,
यीशु मसीह का पिता कौन है ?
इस सवाल का जवाब मैं देने के लिए तैयार हुं
लेकिन
1_यदि कोई हिन्दू राम के बाप का नाम बताएं ?
क्योंकि राम की मां कौशल्या खीर खाने से प्रेगनेंट हुई थी तो दशरथ कैसे राम का पिता हुए ?
वाल्मीकि रामायण बालकाण्ड सर्ग16 श्लोक 30-31 को पढ़ लेना ।
2_ हनुमान का शादी ही नहीं हुआ तो मकरध्वज कैसे हनुमान का बेटा हो गया ?
3_ अय्याप्पा का मां बाप कौन ?
इत्यादि सवाल है इस तरह का ।
इन सवालों का जवाब देने वाला ही यीशु के पिता कौन है
सबको जय मसीह की
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बामनो के पाखंड का भांडा फोड
Sex book
भागवत पुराण भांग के नशे में लिखा गया ग्
भगवत पुराण भांग के नशे मे लिखा गया ग्रंथ
भगवत पुराण 18 प्रमुख पुरानो मे से एक हैं
आस्था संस्कार चॅनल पर प्रवचन देणे वाले कथा वाचक बाबा पंडे सबसे ज्यादा कथा इसी पुराण की बताते है ।
इस ग्रंथ में ऐसी ऐसी बाते लिखी गई है जिसे पढ़ के कोई साइंटिस्ट कपड़े सीने की रस्सी लेकर केले के पेड़ को लटक कर आत्महत्या कर लेगा ।
14000 किमी ऊंचा पेड़
भागवतकार को ऐसे पेड़ की जानकारी थी जो ग्यारह सौ योजन ( 14,080 कि.मी. ) ऊंचा था
चतुर्बेतेषु चूतजंबूकदंबन्यग्रोधाश्चत्वारः पादपप्रवराः पर्वतकेतव इवाधिसहस्रजनो नाहास्तावद् विटपविततयः शतयोजनपरिणाहाः .
भगवत पुराण 5-16-12
अर्थात इन चारों - मंदर , मेरुमंदर , सुपार्श्व और कुमुद पर्वत - के ऊपर इन की जाओं के समान क्रमशः आम , जामुन , कदंब और बड़ के चार पेड़ हैं . इन में से स्यक ग्यारह सौ योजन ( 14,080 कि.मी. ) ऊंचा है और इतना ही इन की शाखाओं विस्तार है . इन की मोटाई सौसौ योजन ( 1,280 कि.मी. ) है . पहाड़ पर ग्यारह मायोजन ( 14,080 कि.मी. )
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कीड़े मारने के उपाय
Sex book
अथर्व वेद 5-23-5 के अनुसार मंत्रो द्वारा कीड़ों को मारा जा सकता है
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