Tuesday, 7 February 2023

आकाश खम्बो पर।

आकाश खम्बो पर टिका है 

ऋग्वेद 10-115-5 के अनुसार इन्द्र ने स्तंभ द्वारा अंतरिक्ष ऊपर धारण किया हुआ है 
 वेद में विज्ञान है 
वो खंभा किसी को देखा तो बनना मुझे भी बताना हम भी देखेंगे

पुत्री पिता।

बृहदारण्यकोपनिषद 
बृहदारण्यकोपनिषद के अनुसार  

स्त्री ने सोचा के कैसे मुझको अपने शरीर से उत्पन कर पुत्री रूपमुझसे संभोग करता है, ऐसा सोच कर वो छिपने के लिए गाय बन गईऔर पिता बैल बन कर संभोग किया जिससे गाय पैदा हुई।इसी तरह कन्या अलग अलग रूप में छिपती रही और पिता उसके साथ उन्ही रूप में संभोग करता रहा और अलग अलग प्राणियों को जन्म देता रहा(बृहदारण्यक उपनिषद, अध्याय 1, ब्रह्मण 4, श्लोक4)

Thursday, 2 February 2023

कर्मफल।

बामनो के पाखंड का भांडा फोड

क्या गीता मनुस्मृती मे व्यवसाय आधारित वर्ण व्यवस्था हैं
Nov. 09/022 

बहोत सारे लोग गीता मनुस्मृति में व्यवसाय आधारित वर्ण व्यवस्था की बात करते है। 

यहां हमने कर्म शब्द का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया है क्युकी आज कल लोग व्यवसाय के लिए कर्म शब्द का इस्तेमाल कर रहे है जबकि दर्शन उपनिषद् में कर्म शब्द की अलग ही व्याख्या है 

दर्शन उपनिषद् में कर्म की व्याख्या ये है आपको यह को जन्म मिला है वो पिछेले जन्म के कर्मों का फल है 

ऐसे ही कर्मो का फल भुगतने के लिए आपको बार बार 84 लाख योनियों से पुनर्जन्म लेना पड़ता है 
RC Joshi 
ये जन्म किस प्राणी का या मनुष्य में किस वर्ण का मिला है ये पिछले जन्म के कर्म पर आधारित होता है 
Prashant Kumar 
और यह बात हम अपनी तरफ से नहीं कह रहे है बल्कि दर्शन उपनिषद् ही ऐसा कहते है 

छान्दोग्य उपनिषद् ही देख लीजिए 

जिसमें 5-10-7 लिखा है कि 

पिछले जन्म के कर्म से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य जन्म मिलता है और पिछले जन्म के पाप से कुत्ता या चांडाल का जन्म मिलता है

तो कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का मतलब भी यही है कि आपको कौनसे वर्ण में जन्म मिलने वाला है य पिछले जन्म के कर्मों से तय होता है 

गीता 4/13 के अनुसार 

(गुण और कर्मों के विभाग से चातुर्वण्य मेरे द्वारा रचा गया है। )

इसमें भी कर्म की व्याख्या यही है कि 

पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर आपको अच्छे बुरे वर्ण में जन्म मिलेगा। 

यहां कर्म भावी जन्म का कारण मात्र है।

जीवों को कर्म फल भुगतने के लिए ईश्वर उन्हें विभिन्न वर्णों में उत्पन्न करता है 

(यह बात हम नहीं बल्कि आपके दर्शन उपनिषद् कहते है)

महाभारत।


महाभारत में अर्जुन के गला काट कर हत्या उसके पुत्र बब्रूवाहन ने कर दिया
 था !
क्योंकि अर्जुन उसके मां चित्रा को सुहागरत के दिन ही छोड़कर भाग गया था ! 😜😝😍

रामायण।



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#_रामायण_के_रामसेतू_पुल_कि_कुछ_गपोड़_कहानियाँ

क्या रामायण में श्रीलंका जाने के लिए सच में पुल का निर्माण किया गया था। अगर किया गया था तो किसका किसका बाप दादा-प्रदादा उस पुल को देखा है जबकि पुल को बनाने में पूरे पांच दिन का समय लगा था। पहले दिन में 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन पुल बनाया था। इस प्रकार कुल 100 योजन लंबाई का पुल समुद्र पर बनाया गया यह पुल 10 योजन चौड़ा था। एक योजन लगभग 08-14km होता है अगर मैं 10km योजन ही लेता हूं तो 10×10= 130km चौड़ा और  100×10=1000km लम्बा होता हैं। क्या आज तक कोई भी व्यक्ति 130km चौड़ा और 1000km लम्बा पुल देखा है?

नोट- श्रीलंका का नाम पहले सिलोन था, 1972 ई. में उसका नाम श्रीलंका रखा गया|



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# सिद्द करो_राम_थे...# या_स्विकार _ करो_कि _रामायण_काल्पनिक_Granth है (१) एक समय पर दो तरह के इंनसान कैसे हो सकते है एक पुछ वाला और एक बिना पुछ वाला...दोनों मनुष्य की तरह बोलते है दोनें के पिता राजा है क्या एेसा संभव है???
(२) मेंढक से मंदोदरी कैसे बनसकती / पेदा हो सकति है???
(३) लँगोटी का दाग छुड़ाने से अंगद कैसे पेदा हो सकता है ???
         पक्षी मनुष्य की तरह कैसे काम कर सकता है जैसे गिद्दराज ???
(४) किसी मनुष्य के 10 सिर हो ही नही सकते इतिहास या पुरातत्व द्दारा आज तक ये सिद्द नही हो पाया की किसी इंसान के 10 सिर 20 भुजाओं वाला कोई मनुष्य नही है...
( ५) जिस लंका की आप बात कर रहे हो, उसका नाम भी 1972 में लंका पड़ा  । इसके पहेले सीलोन व सीलोन से पहेले सिहाली इत्यादि नाम थे तो असली लंका  कहा है
(६) घड़े से लड़की कैसे पैदा हुए ??? मछली से कोई मनुष्य कैसे पैदा हो सकता है ??? एक माह में मकरघ्वज कैसे पैदा हुए ??? मछली से कोई मनुष्य कैसे पैदा हो सकता है??? एक माह में मकरघ्वज पातालपुरी में नौकरी करने लगे क्या ये संभव है ???अगर संभव है तो साबित करो...
(७) 5000 साल पुरानी द्दविड भाषा को कोइ पढ़  नही सकता तो 70000 साल पहेले अंगद किस भाषा शैली क्या थी ???
(८) सम्राट अशोक के काल में अयोध्या का नाम साकेत था तो अयोध्या  के बाद साकेत और साकेत के बाद अयोध्या का नाम साकेत था तो
         अयोध्या के बाद साकेत और साकेत के बाद अयोध्या नाम कैसे पड़ा ???
          पुरातत्व विभाग की तरफ़ से एक भी प्रमाण हो तो बताओ कि राम राज्यथा ???
(९) सात घोड़े से सूर्य कैसे चल रहा है ??? आपकी पुस्तकें कह रही है जबकि विज्ञान कह रहा है कि सूर्य चलताही नही है...
             जब राम का राज्याभिषेक हो रहा था तब सूर्य  एक महीने के लिए रुक गया था, आपकी किताबों में लिखा है । जबकि सूर्य चलता ही नही है अगर सूर्य चलता है तो सिद्द करो / साबित करो...
(१०) सूर्य खाने गए हनुमान की स्पीड और क़द क्या था??? जो हनुमान सूर्य की आग से नही जल सकता,वह पुछ में लगी आग से कैसे जल सकता है ???
(११) बाल्मीकिरामायण कहती है चैत अमवस्या को  रावण का वध होता है तो सच क्या है ???
(१२) सोनेकी खोज हुए  4000 साल हुए है तो 70000 साल पहले सोनेकी लंका कहा से आई थी ??? सोनेका गलनांक 3000 C से अधिक होता है तो बताओ पुछ की आग से इतना तापमान कैसे बढ़  सकता है ??? सोने का महल था या सोने की लंका ??? 6000 साल पूर्व चमडेका परिधान पहनते थे ??? तो 70000 साल पूर्व कपड़े राम कहा से पहनते थे ???
(१३) जब Bharma के मुख से Bhrahman पैदा हुआ तो भारत में ही क्यों पैदा हुआ ??? जबकि Bharma ने विश्व(Universe) रचाया तो चीन,अमेरीका,थाईलैंड ,जापान,दक्षिण कोरिया वग़ैरह दुनिया बाक़ी  देशों में Bhrahman क्यों पैदा नही हुआ ???
(१४) वह कोनसा सोफ्टवेर था जिसे पता चल जाता था कि लक्ष्मण रेखा को सीता पार करे तो कुछ नही हुआ परंन्तु रावण पार करे तो जल उठे ???
(१५) जिस धनुष को रावण उठा नही सका, उसी धनुंष को उठाने वाली सीता को रावण कैसे उठा सकता है ???
           सवाल और भी बहुत है...
ज्योतिबा फुलाने सही कहा था कि पोंगा पंडितों का ज्ञान उनके(पंडितों )ज्ञान पर नही, शुद्धो की अज्ञानता पर टिका हुआ है
              जिस दिन शुद्ध  अपने विवेक,सोच और तर्क -शंकित का उपयोग करना शुरु कर देंगे , उसदिन पोंग पंडितों के द्दारा काल्पनिक गप्प कथाओं के द्दारा निर्मित किये गए क़िले घारासायी हो जाएँगे 
     🌸🌼🌻चारण कान्त🌻🌼🌸


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ब्राह्मण अकेली औरत को देख कर औरत के घर में आ कर ऐसा बोलता हैै :-

"उत्तम सोने के रंग वाली, रेशमी पीले कपड़े धारण करने वाली, तुम्हारे मुंह, आंखे, हाथ और पैर कमलों के समान हैं। तुम भूती या स्वेच्छा पूर्वक विहार करने वाली कामदेव की पत्नी रती तो नहीं हो। तुम्हारे दांत बराबर है। तुम्हारा अग्र भाग कुंद की कलियों के समान शोभा पाते हैं। वे सब  चिकने और सफेद हैं। तुम्हारी आंखें  बड़ी बड़ी और काली हैं। कोएं लाल है। पुतलियां काली है । कटी ( मनुष्य के शरीर का वह मध्य भाग जो पेट और चूतड़ों के बीच में होता है।)का अग्र भाग विशाल और  मांसल है। दोनों जांघें हाथी की सूंड के समान शोभा पा रही हैं।"

"तुम्हारे दोनों स्तन पुष्ट, गोल, परस्पर सटे हुए, मोटे, उठे हुए, कमनिय, ताड़फल के समान आकार वाले है।"

"सुन्दर मुस्कान,  रुचिर दंतावली, मनोहर आंखोवाली मनोहर रमणी, तुम अपने रूप सौंदर्य से  मेरे मन को हर ले रही हो।"

"तुम्हारी कमर इतनी पतली है कि हाथ में आ जाए। बाल चिकने और दिल को हर ले जाने वाले है। तुम्हारे स्तन सटे हुए हैं।"

      ऐसी बातें सुन कर अकेली औरत क्या करेगी ?  नहीं, नहीं। ऐसा नहीं हैं, जैसा आप सोच रहें हैं। आप सोचोगे आज कल के जमाने  के हिसाब से।लेकिन ये कहानी है त्रेता युग की। उस समय के ब्राह्मण, ऋषि, मुनि ऐसे ही हुआ करते थे।  ( ऋषि नहीं महा ऋषि विभांडक का वीर्य अप्सरा को देख कर नहाते समय नदी में गिरा, प्यासी हिरनी ने जल के साथ वीर्य को पी लिया तो उसके पेट से श्रृंगी ऋषि पैदा हुआ जो श्री राम का जीजा था।  )

इस कहानी में अकेली औरत ब्राह्मण की ऐसी बातें सुन कर खुश हो गई। आदर सहित बिठाया। पांव धोने और पीने को पानी दिया और  खाना खाने को बोला। फिर पूछने पर अपने और अपने पति के पूरे खानदान और घर की अंदर कि बातें बता दी। जैसे पिता का नाम, कितने साल शादी को हुए, सवसुर, सास इत्यादि सब के बारे में।

इस कहानी में औरत सीता माता हैं। और ब्राह्मण वेषधारी असल में रावण है।

 सीता माता ने बताया कि 12साल दसरथ के महल में पूरे ठाठ से रही। 13 वे साल मेरे पति राम का राज्य अभिषेक होना था लेकिन काम पीड़ित मेरे सवसुर दसरथ ने  केकई की बात मान कर मेरे पति को बनवास दे दिया। मैं उस समय 18 की थी और मेरे पति 25 के।  इसका मतलब निकलता है कि  राम सीता के विवाह के समय राम कि उमर 12 साल की तथा सीता की 6 साल की थी। जब सीता को रावण ने हरण किया तब बनवास के  10/11 साल बीत चुके थे।  यानी शादी के 22/ 23 साल तक कोई बच्चा नहीं हुआ।  6 साल की उम्र में शादी हुई तो रजस्वला होने की उमर अगर 16 साल भी मान लिया जाए तो  12/13 साल तक बच्चा नहीं हुआ, यह तो मानना ही पड़ेगा।

‌चतुर्वेदी द्वारका प्रसाद शर्मा द्वारा अनुवादित 1927 में छपी और गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित बाल्मीकि रामायण के संबंधित पन्ने पोस्ट कर दिए है। 

Copy From
Ashok Taraksheel


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राजा की गैर हाजरी में राजा का कार्य देखने वाले को क्या यह अधिकार हो सकता है कि वह राज्य के खजाने से किसी को दान करता रहे?

भरत अयोध्या के बाहर 1 कोस के फासले पर नंदीग्राम में सिर पर जटा बना कर काले हिरण का चमड़ा पहन कर, फल मूल खा कर रहते हैं। ( जो हिरण का चमड़ा पहना जाता था वह चमड़ा प्राप्त करने के लिए क्या हिरणों को मारा जाता था या मरे हुए हिरणों की खाल इक्ट्ठी की जाती थी?)

पूरा मंत्रिमंडल भी वही पर था। वह किसी को खुश हो कर 1 लाख गाएं, 100 गांव और 16 क्वारी कन्याएं शादी के लिए दे देते हैं। 

पता है किस को दिए? हनुमान को. 16 क्वारी कन्याएं कुंडलों से विभूषित, सुंदर नासिकाओं वाली, चंद्रमा जैसे मुख वाली, अच्छे आचरण वाली, अच्छे कुल में उत्पन्न यानी कुलीन घरानों की। सोने जैसे रंग वाली। ( लगता है कि क्वारी कन्याएं की लाईन लगवा कर सुंदर नाक, सुंदर मुंह और सुंदर रंग वाली लड़कियों को परखा जाता था और कन्याएं भी कुलीन घरानों से मंगवाई जाती थी)

हनुमान ने भरत को बनवास पूरा करके वापिस आने की खबर दी। उस समय का प्रसंग है यह। लक्ष्मण मूर्छित के इलाज के लिय हनुमान जब पर्वत उठा कर गए उस समय हनुमान की भरत से मुलाकात हुई ऐसा कुछ नहीं लिखा बाल्मिकी रामायण में।

हनुमान ने 16 क्वारी कन्याएं शादी के लिय देने की बात आती है लेकिन हनुमान ने ली या नही, ली तो क्या किया इस पर बाल्मिकी रामायण में कुछ नही लिखा।
( बाल्मिकी रामायण 128 वा सर्ग युद्ध कांड, संबंधित पन्ने भी डाल रहा हूं।)



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रामायण की साइंस के अनुसार एक टाइम पर पहाड़ों के पंख हुया करते थे और वो हवा में उड़ते थे।😆
सुंदर काण्ड सर्ग 1: 119 

जंवर के साथ पहाड़ भी उड़ता था

साठ हजार पुत्र।

बाल्मीकि रामायण के सर्ग 38 में हमने राजा सगर के 60हज़ार पुत्रों के जन्म के बारे में देखा था ।
की कैसे एक तुंबी के द्वारा बच्चों का जन्म हुआ😅

अब हम उसके आगे वाले सर्ग 39 – 40 में देखेंगे कि कैसे राजा सगर का यज्ञ का घोड़ा इंदर चुरा लेता है

और राजा सगर अपने 60हज़ार पुत्रों को घोड़ा खोजने के लिए बेजते है।

और 60 हजार मिलकर सारी पृथिवी पर उसे खोजते है 
पर नही मिलता फिर वो अपने हाथों से पृथ्वी को खोद डालते है।

और अपने पिता के पास खाली हाथ जाते है और फिर उनके पिता उन्हे दुबारा से बेझते है और इस बार फिर वो पृथ्वी को खोदते है और वो ऐसे दिगज लोगो को देखते है जो पृथ्वी को अपने ऊपर उठाए हुए है🤔🤔

और वो उनको मिलकर आगे जाते है यहां वो उस घोड़े को कपिलदेव के पास देखते है और उन्हें बुरा भला कहने पर वो 60 हजार को जला डालता है और वो वही मर जाते है।

अब जो हिंदू भाई बहन ये कहते है को हमारे ग्रंथों में बहुत विज्ञान है उनसे सवाल । 

क्या ये आसान बात है की मनुष्य हाथों से सारी पृथ्वी को खोद डाले ?

और क्या पृथिवी की नीचे सच में ऐसे कोई दिग्ज है जो पृथ्वी को अपने ऊपर उठाए हुए है?

रामायण की इन बातों से साबित होता है की इनके मुताबिक पृथ्वी के चार कोने है ओर उन कोनो को चार दिग्जो ने उठाया है

जिनके हिलने से भूकंप आते है😂😂

क्या विज्ञान लिखा है मेरे हिन्दू है बहन जवाब दे सकते है


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प्रश्न। गप्प।

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ये ऐसे सवाल है जो बहुत हि सोचने लायक है। जैसे कि -

1:- सभी देवी देवताओ ने भारत मे हि जन्म क्यो लिया?
क्यो किसी भी देवी देवता को भारत के बाहर कोइ नही जानता ?

2:- जितने भी देवी देवता देवताओ की सवारीया है उनमे सिर्फ वही जानवर क्यो है जो कि भारत मे ही पाये जाते है?
एसे जानवर क्यो नही जो कि सिर्फ कुछ हि देशो मे पाये जाते है, जैसे कि कंगारु, जिराफ आदी !!

3:- सभी देवी देवता हमेशा राज घरानो मे हि जन्म क्यो लेते थे ?
क्यो किसी भी देवी देवता ने किसी गरीब या शुद्र के यहा जन्म नही लिया?

4:- पोराणीक कथाओ मे सभी देवी देवताओ की दिनचर्या का वर्णन है जैसे कि कब पार्वती ने चंदन से स्नान किया, कब गणेश के लिये लड्डु बनाये, गणेश ने कैसे लड्डु खाये.. आदी 
लेकीन जैसे हि ग्रंथो कि स्क्रीप्ट खत्म
हो गयी भगवानो कि दिनचर्या भी खत्म..
तो क्या बाद में सभी देवीदेवताऔ का देहांत हो गया ??
अब वो कहाँ है? उनकी औलादे कहाँ है?

5:- ग्रंथो के अनुसार पुराने समय मे सभी देवी देवताओ का पृथ्वी पर आना-जाना लगा रहता था।
जैसे कि किसी को वरदान देने या किसी पापी का सर्वनाश करने..
लेकीन अब एसा क्या हुआ जो देवी देवताओ ने पृथ्वी पर आना बंद
हि कर दिया??

6:- जब भी कोइ पापी पाप फैलाता था तो उसका नाश करने के लिये खुद भागवान किसी राजा के यहा जन्म लेते थे फिर 30-35 की उम्र तक जवान होने के बाद वो पापी का नाश करते थे,
ऐसा क्यों? 
पापी का नाश जब भगवान खुद हि कर रहे है तो 30-35 साल का इतना ज्यादा वक्त क्यो??? 
भगवान सिधे कुछ क्यो नही करते??
जीस प्रकार उन्होने अपने खुद के ही भक्तो का उत्तराखण्ड मे नाश किया ?

(7) अगर हिन्दू धर्म कई हज़ार साल
पुराना है, तो फिर भारत के बाहर इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं हुआ और एक भारत से बाहर के धर्म “इस्लाम-ईसाई” को इतनी मान्यता कैसे हासिल
हुई?
वो आपके अपने पुरातन हिन्दू धर्म से ज़्यादा अनुयायी कैसे बना सका? हिन्दू देवी-देवता उन्हें नहीं रोक रहें??

(8) अगर हिन्दू धर्म के अनुसार एक
जीवित पत्नी के रहते, दूसरा विवाह अनुचित है, तो फिर राम के पिता दशरथ ने चार विवाह किस नीति अनुसार किये थे?

(9) अगर शिव के पुत्र गनेश की गर्दन शिव ने काट दी, तो फिर यह कैसा भगवान है??
जो उस कटी गर्दन को उसी जगह पर क्यों नहीं जोड़ सका??
क्यों एक पिरपराध जानवर (हाथी) की हत्या करके उसकी गर्दन गणेश की धढ पर लगाई? 
एक इंसान के बच्चे के धढ़ पर हाथी की गर्दन कैसे फिट आ गयी?

(10) अगर हिन्दू धर्म में मांसाहार वर्जित है, तो फिर राम स्वर्णमृग (हिरन) को मारने क्यों गए थे? क्या मृग हत्या जीव हत्या नहीं है?

(11) राम अगर भगवान है, तो फिर उसको यह क्यों नहीं पता था कि रावण की नाभि में अमृत है?
अगर उसको घर का भेदी ना बताता कि रावण की नाभि में अमृत है, तो उस युद्ध में रावण कभी नहीं मारा जाता।
क्या भगवन ऐसा होता है?

(12) तुम कहते हो कि कृष्ण तुम्हारे भगवन हैं, तो क्या नहाती हुई निर्वस्त्र गोपीयों को छुपकर देखने वाला व्यक्ति, भगवान हो सकता है?
अगर ऐसा काम कोई व्यक्ति आज के दौर में करे, तो हम उसे छिछोरा-नालायक कहते हैं। 
तो आप कृष्ण को भगवान क्यों कहते हो?

(13) हिन्दूओ में बलात्कारीयों का प्रमाण अधिक क्यों होते हैं?

(14) शिव के लिंग (पेनिस) की पूजा क्यों करते हैं? क्या उनके शरीर में कोई और चीज़ पूजा के क़ाबिल नहीं?

(15) खुजराहो के मंदिरों में काम-क्रीड़ा और उत्तेजक चित्र हैं, फिर ऐसे स्थान को मंदिर क्यों कहा जाता है?
क्या काम-क्रीडा, हिन्दू धर्मानुसार पूजनीय है?

इस बात को सभी को शेयर करो ताकि सभी को पता चले..

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महाभारत इस महान विज्ञान  ग्रन्थ में ऐसी-ऐसी गप्पे हांकी गई है कि कोई भी समझदार व्यक्ति इन्हें सत्य नही मान सकता
उदाहरण के लिए देखिये:---🤔😳

(1) घृताची नामक अप्सरा को नग्नावस्था में देखकर भारद्वाज ऋषि का वीर्यपात हो गया जिसे उन्होंने दोने में रख दिया उससे द्रोणाचार्य पैदा हुऐ,
(महाभारत,,आदिपर्व,अ०129)

(2) ऋषि विभाण्डक एक बार नदी में नहा रहे थे तभी उर्वशी को देखकर उनका वीर्य स्खलित हो गया नदी के उस वीर्य मिश्रित पानी को एक मृगी पी गई उसने एक मानव शिशु को जन्म दिया, यहीं श्रृंग ऋषि कहलाये,
(महाभारत,, वनपर्व,अ० 110)

(3) राजा उपरिचर का एक बार वीर्यपात हो गया उसने उसे दोने में डालकर एक बाज के द्वारा रानी गिरिका के पास भेजा। रास्ते में किसी दूसरे बाज ने उस पर झपट्टा मारा, जिससे वह वीर्य यमुना नदी में गिर गया और एक मछली ने निगल लिया इससे उस मछली ने एक लड़की को जन्म दिया लड़की का नाम सत्यवती रखा गया जो महाऋषि व्यास की माँ थी,
(महाभारत,, आदिपर्व,अ०166,15)

(4) महाऋषि व्यास हवन कर रहे थे और जल रही आग में से धृष्टधुम्न और द्रोपदी पैदा हुए,
(महाभारत,, आदिपर्व,166,39-44)

(5) महाराज शशि बिंदु की एक लाख रानिया थी। हर रानी के पेट से एक-एक हजार पुत्र जन्मे कुल मिलाकर राजा के 10 करोड़ पुत्र हुवे। तब राजा ने एक यज्ञ किया, और हर पुत्र को एक-एक ब्राह्मण को दान कर दिया, हर पुत्र के साथ सौ रथ और सौ हाथी दिए। (कुल मिलाकर 10 करोड़ पुत्र,10 करोड़ ब्राह्मण,10 अरब हाथी,10 अरब रथ) इसके अलावा हर पुत्र के साथ 100-100 युवतियां भी दान दी,
(महाभारत,, द्रोणपर्व,अ०65 तथा शांतिपर्व 108)

(6) एक राजा हर रोज प्रातः एक लाख साठ हजार गौएँ दस हजार घोड़े और एक लाख स्वर्णमुद्राएँ दान करता था यह काम वह लगातार 100 वर्षो तक करता रहा,
(महाभारत,, आ०65,श्लोक 13)

(7) राजा रंतिदेव की पाकशाला में प्रतिदिन 2000 गायें कटती थी। मांस के के साथ-साथ अन्न का दान करते-करते रंतिदेव की कीर्ति अद्वितीय हो गयी,
(महाभारत,, आ०208,वनपर्व,8-9)

(8) संक्रति के पुत्र राजा रंतिदेव के घर पर जिस रात में अतिथियों ने निवास किया, उस रात इक्कीस हजार गायों का वध किया गया,
(महाभारत,, द्रोण पर्व,अ०67,श्लोक 16)

(9) राजा क्रांति देव ने गोमेध यज्ञ में इतनी गायों को मारा कि  रक्त,मांस,मज्जा से चर्मण्यवती नदी बह निकली,
(महाभारत,, द्रोण पर्व अ०67,श्लोक,5)
👉यह है भक्तों की प्राचीन सभ्यता जिस पर भक्त गर्व करतें है

वैदिक ईश्वर सशरीर।


वैदिक  ईश्वर शरीरधारी  

*  हे बृहस्पति और इंद्र आनंद देने वाले बलवान विरो को निवास कराने वाले तुम दोनों सोमरस को इस यज्ञ में पीओ । ( अर्थववेद 20 : 13 : 1 )

* आगे बढ़ो और  आकाश में आओ जाओ तुम्हारे लिए स्थान बनाया गया है  (अर्थववेद 20 : 13 : 2 )

* ☝️ उड़ने वाले घोड़े से आकाश में आते जाते थे  🤔 कभी घोड़ा कभी हाथी क्या तमाशा लगा रखा है वैदिक ईश्वर ने ?

* इन्द्र के दो हाथ है जो अवसर आने पर उसका उपयोग करता है ।  (अर्थववेद 19 : 13 : 1 )

* हे इन्द्र  धन के लिए जोड़े  गये  सुंदर केशो ( बाल )
वाले रथ चलने वाले दो घोड़े  तुझको सब ओर ले चले 
 (अर्थववेद 20 : 38 : 2 )  (अर्थववेद 20 : 47 : 28 )

* व्रजधारी ( हाथों में हथियार वाला ) तेजोमय इन्द्र ही हवा नित्य मिले हुए दोनों संयोग वियोग गुणों का मिलाने वाला है और वचन का योग्य बनाने वाला है ।  
(अर्थववेद 20 : 38 : 5 )

* क्या पोपलीला है वैदिक ईश्वर कभी  घोड़े पर सवारी कभी
कभी व्रजधारी क्या मिथ्या है निराकार की 🙄

*  और कई सौ उदहारण है शरीर धारी होने के परंतु अक्ल मंदो के लिए इतना काफी है वैदिक ईश्वर ( इन्द्र ) नशेड़ी होने के साथ साथ बलात्कारी भी था 👇👇👇👇

* तो ये थे वैदिक ईश्वर के शरीर धारी और नशेडी होने के कुछ प्रमाण क्या बात है ये तो चंद ही है नही तो वेद अश्लीलता और ऐसी बातों से भरा पड़ा है । चलो एक क्षण के लिए मान लिया कि सोमरस का मतलब ओषधि है , पर ये तो सिद्ध हुआ कि वैदिक ईश्वर  शरीरधारी है और वेदों का बनावटी ईश्वर निराकार नही बल्कि दो पैरो पर चलने कोई मूर्ख मनुष्य है जिसने अपने स्वार्थ के लिए वेदों की रचना की थी , नियोग के नाम पर अपनी हवस पूरी करना अपने आपको श्रष्ट बनाने के लिए  शुद्र आदि के नाम देना और बहुत कुछ केवल अपने मतलब के लिए 😢

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शुद्र।

*जिस धर्म के धर्मसास्त्रों में ऐसी बातें लिखी है, क्या वह धर्म धर्माचरण करने लायक है*****************************************************************
जब हम पढ़े लिखे नहीं थे तो हमारी मजबूरी थी । लेकिन आज शिक्षित समाज को ऐसे धर्म के धर्माचरण क्यों करना चाहिए ?

1 - यह जो ब्राम्हण, क्षेत्रीय, वैश्य व शूद्र जो विभाजन है वह मेरा द्वारा ही रचा गया है।
         - :गीता 4-13

2 - मेरी शरण में आकर स्त्री ,वैश्य , शूद्र भी जिन कि उत्त्पति पाप योनि से हुई है, परम  गति को प्राप्त हो जाते है।
           -:भगवत गीता 9-32

3 - शूद्र का प्रमुख कार्य तीनों वर्णो की सेवा करना है।
         -: महाभारत  4/50/6

4 - शूद्र को सन्चित धन से स्वामी कि रक्षा करनी चाहिये।
    -:  महाभारत 12/60/36

5 - शूद्र तपस्या करे तो राज्य निर्धनता में डूब जायेगा।
      -: वाo .रामायण 7/30/74

6- ढोल .गवार .शूद्र पशु नारी  |
 सकल ताड़ना के अधिकारी ||
       -: रामचरित मानस 59/5

7- पूजिये विप्र सील गुन हीना, शूद्र न गुण गन ग्यान प्रविना।
            -:रामचरितमानस 63-1

8- वह शूद्र जो ब्राम्हण के चरणो का धोवन पीता है राजा उससे कर TAX न ले।
 -: आपस्तंबधर्म सूत्र 1/2/5/16

9 - जिस गाय का दूध अग्निहोत्र के काम आवे शूद्र उसे न छुये। 
  - : कथक सन्हिता 3/1/2

10- शूद्र केवल दूसरो का सेवक है इसके अतिरिक्त उसका कोइ अधिकार  नही है।
  -: एतरेय ब्राम्हण 2/29/4

11- यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा दे तो उस ब्राम्हण को चान्डाल की भाँति त्याग देना चाहिये।
    -: स्कंद पुरान  10/19

12 - यदि कोइ शूद्र वेद सुन ले तो पिघला हुआ शीशा, लाख उसके कान में डाल देना चाहिये।
यदि वह वेद का उच्चारण करे तो जीभ कटवा देना चाहिये। वेद स्मरण करे तो मरवा देना चाहिये।
  -: गौतम धर्म शूत्र 12/6

13 - देव यज्ञ व श्राद्ध में शूद्र को बुलाने का दंड 100 पर्ण।
     - : विष्णु स्मृति 5/115

14 - ब्राम्हण कान तक उठा कर प्रणाम करे, क्षत्रिय वक्षस्थल तक, वैश्य कमर तक व शूद्र हाथ जोड़कर एवं झुक कर प्रणाम करे।
 -: आपस्तंब धर्म शूत्र 1,2,5,/16

15 - ब्राम्हण की उत्पत्ति देवता से, शूद्रो की उत्पत्ति राक्षस से हुई है।
 -: तेत्रिय ब्राम्हण 1/2/6/7

17 - यदि शूद्र जप ,तप, होम करे तो राजा द्वारा दंडनिय है।
  -: गौतम धर्म सूत्र  12/4/9

17- यज्ञ करते समय शू


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कौशल्या।

नए साल की शुभकामनाएँ 2023

कौशल्या कि घोडे के साथ एक रात और खिर पिने से राम का जन्म 

अश्वमेध यज्ञ के बार मे तो बहोत सारे लोग पहले से हि जानते है. 

जिसमे राणी को मृत घोडे के साथ सेक्स करना पडता था. 

ऐसा अश्वमेध यज्ञ दशरथ ने भी किया था 

जिसका उल्लेख वाल्मिकी रामायण के बालकांड सर्ग 14 मे है. 

देखे...... 

यज्ञ के लिए 300 पशु और राजा दशरथ का श्रेष्ठ घोडा बांधा था(श्लोक 32) 

राणी कौशल्या ने घोडे कि प्रदिक्षीणा करके तिन वार मे घोडे को मारा(श्लोक 33) 

धर्मपालन के लिए कौशल्या ने घोडे के साथ एक रात निवास किया(श्लोक 34)

उसके बाद श्लोक 36,37,38 मे घोडे कि चरबी का हवन करने का उल्लेख है. 

इस यज्ञ के बाद पुत्रेष्टि यज्ञ का उल्लेख है. 

जिसमे तिनो राणीया खिर पिकर गर्भवती हुई थी. 

देखे.... 

बालकांड सर्ग 16 

यज्ञ से एक विशाल पुरुष प्रकट हुआ(श्लोक 11) 

प्रकट हुये पुरुष ने दशरथ से कहा.... 

ये देवताओ द्वारा बनायी खिर है इससे संतान प्राप्ती होगी और धन आरोग्य कि वृद्धी होगी(श्लोक 19) 

ये खिर अपनी पत्नीओं को खाने के लिए दो जिससे उनकी गर्भधारना होगी(श्लोक 20) 

वो खिर खाणे से तिनो राणीया गर्भवती हो गयी(श्लोक 31) 

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देखे : वाल्मिकी रामायण बालकांड सर्ग 14 और 16

दोनो कथाओ के ss निचे 👇

पशु संभोग।



नास्तिक।


टाइगर, Sher,

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